15.12.16
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को बेंच पर बैठाने की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि कोर्ट इसकी निगरानी भी करेगी। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले एवं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश सरकार की ओर से प्रदेशभर के एक लाख प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बेंच मुहैया कराने के लिए समय मांगे जाने पर दिया। सरकार कीओर से बताया गया कि प्रदेशभर में लगभग एक लाख प्राथमिक स्कूल हैं और इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बेंच पर बैठने की व्यवस्था करने में पौने चार हजार लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। कहा गया कि इतने वृहद स्तर पर खर्च के लिए वित्त विभाग व कैबिनेट का निर्णय आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में कार्यवाही जारी रखे। कोर्ट स्वयं इसकी मॉनीटिरिंग करेगी। जालौन के कृष्ण प्रकाश त्रिपाठी की जनहित याचिका में स्कूलो में टाट-पट्टी पर बैठ रहे बच्चों की दशा पर गंभीर हाईकोर्ट ने सरकार से प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था करने को कहा था। खर्च का ब्यौरा मांगने पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि प्राइमरी स्कूलों में एक से पांच तक कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में 32 छात्र रहते हैं। इस प्रकार एक कक्षा के लिए 16 बेंच जरूरी है। ऐसे में एक प्राइमरी स्कूल के लिए 80 बेंच चाहिए। अपर प्राइमरी स्कूल में तीन कक्षाएं चलती हैंइसलिए वहां 48 बेंच होनी चाहिए। बताया गया इस फार्मूले पर लगभग एक लाख स्कूलों के लिए पौने हजार लाख रुपये खर्च आएगा।
यूपी बोर्ड के 2017 के परीक्षा कार्यक्रम पर बुधवार को निर्णायक वार्ता नहीं हो पाई। कार्यक्रम पर विचार-विमर्श
करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा निर्वाचन आयोग पहुंचे लेकिन यहां पर कोई निर्णायक वार्ता नहीं हो पाई।
बीते शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक में आयोग ने निर्देश दिए थे कि यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम का निर्धारण चुनाव आयोग के साथ विमर्श कर तय किया जाए। यूपी बोर्ड ने गुरुवार को परीक्षा कार्यक्रम जारी किया था जिस पर कुछ ही घंटे बाद रोक लगा दी गई थी। यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव ने बोर्ड परीक्षा की तारीखों की घोषणा की थी कि 10वीं की परीक्षा 16 फरवरी से 6 मार्च तक और इंटरमीडिएट की परीक्षा 16 फरवरी से 20 मार्च तक कराई जाएंगी। हाईस्कूल की परीक्षाएं 15 और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 25 कार्यदिवसों में कराई जाएंगी।
करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा निर्वाचन आयोग पहुंचे लेकिन यहां पर कोई निर्णायक वार्ता नहीं हो पाई।
बीते शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक में आयोग ने निर्देश दिए थे कि यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम का निर्धारण चुनाव आयोग के साथ विमर्श कर तय किया जाए। यूपी बोर्ड ने गुरुवार को परीक्षा कार्यक्रम जारी किया था जिस पर कुछ ही घंटे बाद रोक लगा दी गई थी। यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव ने बोर्ड परीक्षा की तारीखों की घोषणा की थी कि 10वीं की परीक्षा 16 फरवरी से 6 मार्च तक और इंटरमीडिएट की परीक्षा 16 फरवरी से 20 मार्च तक कराई जाएंगी। हाईस्कूल की परीक्षाएं 15 और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 25 कार्यदिवसों में कराई जाएंगी।
यूपी के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए बेंच मुहैया कराने के निर्देश, अब जमीन पर न बैठेगे छात्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को बेंच पर बैठाने की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि कोर्ट इसकी निगरानी भी करेगी।
मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले एवं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश सरकार की ओर से प्रदेशभर के एक लाख प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बेंच मुहैया कराने के लिए समय मांगे जाने पर दिया। सरकार कीओर से बताया गया कि प्रदेशभर में लगभग एक लाख प्राथमिक स्कूल हैं और इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बेंच पर बैठने की व्यवस्था करने में पौने चार हजार लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। कहा गया कि इतने वृहद स्तर पर खर्च के लिए वित्त विभाग व कैबिनेट का निर्णय आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में कार्यवाही जारी रखे। कोर्ट स्वयं इसकी मॉनीटिरिंग करेगी।
जालौन के कृष्ण प्रकाश त्रिपाठी की जनहित याचिका में स्कूलो में टाट-पट्टी पर बैठ रहे बच्चों की दशा पर गंभीर हाईकोर्ट ने सरकार से प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था करने को कहा था। खर्च का ब्यौरा मांगने पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि प्राइमरी स्कूलों में एक से पांच तक कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में 32 छात्र रहते हैं। इस प्रकार एक कक्षा के लिए 16 बेंच जरूरी है। ऐसे में एक प्राइमरी स्कूल के लिए 80 बेंच चाहिए। अपर प्राइमरी स्कूल में तीन कक्षाएं चलती हैंइसलिए वहां 48 बेंच होनी चाहिए। बताया गया इस फार्मूले पर लगभग एक लाख स्कूलों के लिए पौने हजार लाख रुपये खर्च आएगा।
मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले एवं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश सरकार की ओर से प्रदेशभर के एक लाख प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बेंच मुहैया कराने के लिए समय मांगे जाने पर दिया। सरकार कीओर से बताया गया कि प्रदेशभर में लगभग एक लाख प्राथमिक स्कूल हैं और इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बेंच पर बैठने की व्यवस्था करने में पौने चार हजार लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। कहा गया कि इतने वृहद स्तर पर खर्च के लिए वित्त विभाग व कैबिनेट का निर्णय आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में कार्यवाही जारी रखे। कोर्ट स्वयं इसकी मॉनीटिरिंग करेगी।
जालौन के कृष्ण प्रकाश त्रिपाठी की जनहित याचिका में स्कूलो में टाट-पट्टी पर बैठ रहे बच्चों की दशा पर गंभीर हाईकोर्ट ने सरकार से प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था करने को कहा था। खर्च का ब्यौरा मांगने पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि प्राइमरी स्कूलों में एक से पांच तक कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में 32 छात्र रहते हैं। इस प्रकार एक कक्षा के लिए 16 बेंच जरूरी है। ऐसे में एक प्राइमरी स्कूल के लिए 80 बेंच चाहिए। अपर प्राइमरी स्कूल में तीन कक्षाएं चलती हैंइसलिए वहां 48 बेंच होनी चाहिए। बताया गया इस फार्मूले पर लगभग एक लाख स्कूलों के लिए पौने हजार लाख रुपये खर्च आएगा।
शिक्षक ने लगाई एडवांस हाजिरी, वाट्स एप से गई नौकरी
आगरा: परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों का बिना विद्यालय आए हाजिरी लगाने का खेल चल रहा है। ऐसा ही एक मामला पकड़ में आया है। शिक्षक ने एक दिन पहले ही अपनी हाजिरी लगा दी थी। बीएसए ने उसे निलंबित कर
दिया है।
परिषदीय विद्यालयों में अक्सर शिक्षकों के न आने की शिकायतें मिलती रहती हैं। मगर, इसके बाद भी पंजिका में उनकी उपस्थिति दर्ज रहती है। फतेहपुर सीकरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय उत्तू में तैनात प्रधानाध्यापक राजेश कुमारी आठ दिसंबर को विद्यालय आई थीं। मगर, उन्होंने विद्यालय से जाते समय अगले दिन की एडवांस उपस्थिति पंजिका में लगा दी। उनके इस खेल को किसी ने अपने मोबाइल में कैद कर बीएसए दिनेश यादव को वाट्स एप कर दिया। इस पर बीएसए ने मामले की जांच के लिए सुबह ही एत्मादपुर की खंड शिक्षाधिकारी को फतेहपुर सीकरी भेजा। जब बीईओ वहां पहुंची तो शिक्षिका विद्यालय में अनुपस्थित थीं। उपस्थिति पंजिका देखी तो उसमें हाजिरी लगी हुई थी। इतना ही नहीं उसमें ये भी लिखा था कि 11 बजे विद्यालय कार्य से बीआरसी पर गई हैं, जिससे कोई 11 बजे के बाद पहुंचे तो उसे बता दिया जाए कि वो बीआरसी गई हैं। खंड शिक्षाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट बीएसए को दे दी है। बीएसए ने बताया कि प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है।
ब्लॉकों में चल रहा एमएसटी का खेल
बिना स्कूल आए वेतन लेने के कई मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। ये पूरा खेल खंड शिक्षाधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। पूर्व बीएसए ने भी कई ब्लॉकों में 'एमएसटी' का खेल पकड़ा था।
दिया है।
परिषदीय विद्यालयों में अक्सर शिक्षकों के न आने की शिकायतें मिलती रहती हैं। मगर, इसके बाद भी पंजिका में उनकी उपस्थिति दर्ज रहती है। फतेहपुर सीकरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय उत्तू में तैनात प्रधानाध्यापक राजेश कुमारी आठ दिसंबर को विद्यालय आई थीं। मगर, उन्होंने विद्यालय से जाते समय अगले दिन की एडवांस उपस्थिति पंजिका में लगा दी। उनके इस खेल को किसी ने अपने मोबाइल में कैद कर बीएसए दिनेश यादव को वाट्स एप कर दिया। इस पर बीएसए ने मामले की जांच के लिए सुबह ही एत्मादपुर की खंड शिक्षाधिकारी को फतेहपुर सीकरी भेजा। जब बीईओ वहां पहुंची तो शिक्षिका विद्यालय में अनुपस्थित थीं। उपस्थिति पंजिका देखी तो उसमें हाजिरी लगी हुई थी। इतना ही नहीं उसमें ये भी लिखा था कि 11 बजे विद्यालय कार्य से बीआरसी पर गई हैं, जिससे कोई 11 बजे के बाद पहुंचे तो उसे बता दिया जाए कि वो बीआरसी गई हैं। खंड शिक्षाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट बीएसए को दे दी है। बीएसए ने बताया कि प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है।
ब्लॉकों में चल रहा एमएसटी का खेल
बिना स्कूल आए वेतन लेने के कई मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। ये पूरा खेल खंड शिक्षाधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। पूर्व बीएसए ने भी कई ब्लॉकों में 'एमएसटी' का खेल पकड़ा था।
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