29.3.17

नई पेंशन देने के सभी नियम तैयार, लेकिन अभी भी अंशदान का इंतजार

इलाहाबाद : कर्मचारियों की नई पेंशन को राष्ट्रीय पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है। इसके लिए तमाम नए-नए नियम भी बनाए गए हैं। जिन्हें इसका लाभ दिया जाना है, उनके वेतन से पेंशन के लिए कटौती भी शुरू हो गई है, लेकिन सरकार का अंशदान कब से मिलेगा यह स्पष्ट नहीं है। यही नहीं जिलों में इसका सिस्टम तक नहीं बन पाया है। कर्मचारियों को इसका लाभ फिलहाल नहीं मिल रहा है। 1प्रदेश में एक अप्रैल 2005 के बाद
नियुक्त हुए सभी अधिकारी कर्मचारियों को नई पेंशन योजना से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए पिछले कई महीने से लगातार निर्देश जारी हो रहे हैं और एक के बाद एक नियम बन रहा है। कुछ दिन पहले यह घोषणा भी हुई कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली की पासबुक भी बनाई जाएगी। नियम बन गए हैं लेकिन अनुपालन करने वाले इस ओर से उदासीन हैं। अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना है। इसके लिए हर जिला मुख्यालय पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर, कंप्यूटर सिस्टम और सॉफ्टवेयर आदि का इंतजाम होना था, लेकिन अब किसी भी जिले में यह व्यवस्था नहीं हो सकी है। यह जरूर है कि बीते मई माह से शिक्षक व अन्य के वेतन से पेंशन का अंशदान की कटौती शुरू हो गई है, जो ट्रेजरी में जमा की जा रही है। पेंशन लाभ के लिए सरकारी अंशदान मिलना है, लेकिन अब तक यह नहीं दिया जा रहा है। इससे शिक्षक व अन्य को ब्याज का नुकसान होने के साथ ही पेंशन का वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षक भी इस ओर से उदासीन हैं, उन्हें नहीं पता कि जो कटौती हो रही है उसका लाभ उन्हें मिलेगा भी या नहीं। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेता डॉ. शैलेश कुमार पांडेय ने कहा है कि माध्यमिक के शिक्षकों को लाभ दिलाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे।

शिक्षक भर्ती से रोक हटाए शासन, रोक न हटने पर शिक्षा निदेशालय पर होगा बेमियादी धरना

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में चल रही सभी भर्तियों पर शासन ने रोक लगा रखी है। प्राथमिक विद्यालयों में 12460 शिक्षकों की भर्ती एकाएक रोक लगने से दावेदार परेशान हैं। उनका कहना है कि तमाम प्रयास के बाद यह नियुक्तियां शुरू हुई थी उस पर रोक हटाई जाए। 1युवाओं ने अल्टीमेटम दिया है कि उनकी अनसुनी हुई तो वह तीन अप्रैल से शिक्षा निदेशालय में बेमियादी धरना देंगे.

परिषदीय प्राथमिक स्कूलों के लिए शासन ने 15 दिसंबर, 2016 को भर्ती का आदेश दिया था। इस भर्ती की पहले चरण की काउंसिलिंग हो चुकी है, दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही रोक लग गई है। युवाओं का कहना है कि उन लोगों ने चार महीने तक लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना दिया था, तब यह भर्ती शुरू हुई।1इसमें भर्तियां शैक्षिक गुणांक के आधार पर होनी है इसलिए गड़बड़ी की भी कोई आशंका नहीं है। साथ ही इस भर्ती के नियमों को लेकर कोर्ट ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। कबीर चौधरी, शुभम चंद्रा, दिव्या मौर्या, अतुल द्विवेदी, दीपक सिंह आदि ने जल्द प्रक्रिया शुरू कराने की मांग बेसिक शिक्षा परिषद सचिव से की है।

स्कूलों की मनमानी के खिलाफ खड़ी हुई परिषद, गैर मान्यता व बिना मानक वाले स्कूलों पर रोक की मांग

इलाहाबाद 1स्कूलों में नया सत्र आरंभ हो रहा है और अभिभावकों की जेब पर यह भारी गुजरने वाला है। इसलिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा है। अभाविप ने प्रशासन से गैर मान्यता व मानक के विपरीत चल रहे स्कूलों को बंद करवाने और अन्य स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन देकर यह चेतावनी भी दी कि यदि इस पर रोक
नहीं लगी तो परिषद बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।1अपर जिलाधिकारी नगर पुनीत शुक्ल को सौंपे ज्ञापन में अभाविप नेताओं ने कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण कर दिया गया है। हर साल अभिभावकों से एडमिशन फीस ली जा रही है, उन्हें जबरन स्कूल में बनी दुकानों से मनचाहे प्रकाशन की पुस्तकें खरीदने को स्कूल प्रबंधन बाध्य कर रहे हैं। इसके अलावा गरीब छात्रों को 25 फीसद प्रवेश दिए जाने के नियम का भी पालन पूरी तरह से नहीं किया जा रहा है। परिषद ने कहा कि गैर मान्यता वाले व अन्य कई स्कूलों में शिक्षक निम्न योग्यता रखने वाले हैं। जिससे बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। 1एडीएम ने अभाविप को उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। ज्ञापन देने वालों में परिषद के प्रयाग महानगर महामंत्री रिंकू पयासी, शनि शुक्ला, अंजनी शुक्ला, धीरज चौबे, राहुल सिंह, कृष्णप्रताप सिहं, वीरेंद्र सिंह, अविनाश पांडेय, राहुल यादव, अंशुमान सिंह, अनुराग तिवारी, सुमित द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।’>>अभाविप ने की गैर मान्यता व बिना मानक वाले स्कूलों पर रोक की मांग

बेसिक शिक्षकों के अंतरजिला तबादले पर जवाब-तलब

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अंतर जिला तबादले में धांधली के आरोप में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि उन शिक्षकों का तबादला कैसे हो गया जिन्होंने एक जिले में तीन वर्ष की तैनाती की न्यूनतम अर्हता पूरा नहीं की है। कोर्ट ने ऐसे लगभग 75 स्थानान्तरित शिक्षकों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा। शिक्षिका निधि और
दर्जनों अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं। याची के अधिवक्ता ने बताया कि 23 जून, 2016 को अंतर जिला स्थानांतरण की नीति घोषित की गई। उसके मुताबिक एक जिले में कम से कम तीन वर्ष से तैनात शिक्षक ही आवेदन कर सकेंगे। आवेदन ऑनलाइन किया जाना था। यह भी शर्त थी कि शिक्षक गृह जिला सहित पांच वरीयता भी देंगे। याचीगण ने ऑनलाइन आवेदन किया, मगर उनका स्थानांतरण नहीं किया गया, जबकि ऐसे शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया जिन्होंने न तो तीन वर्ष की अर्हता पूरी की है और न ही ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद 19 दिसंबर, 2016 को एक शासनादेश जारी कर कहा गया कि उन्हीं शिक्षकों का स्थानांतरण होगा जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया है। याचिका में कहा गया है कि स्थानांतरण नीति और शासनादेश दोनों का उल्लंघन किया गया है।