इलाहाबाद : शिक्षक भर्ती में शामिल रहे युवा पहले से अलग-अलग खेमों में बंटे हैं। भर्ती मामले न्यायालय में पहुंचने पर चयनित और चयन से चूकने वालों के बीच अपने को सही साबित करने की होड़ मची है। इस बीच चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों की जुबां से युवाओं के लिए निकली आवाज के मायने भी निकाले जा रहे हैं और उसी तहत समर्थन और विरोध का सिलसिला तेज हो गया है। महज चर्चा के आधार पर ही युवाओं में इन दिनों तलवारें खिंच गई हैं। 1युवाओं को रोजगार की बातें रास आती हैं। उनकी ख्वाहिश ज्यादा से ज्यादा नौकरियों के मौके मिले, लेकिन किसी खास की नौकरी को लेकर बात आए तो दूसरे पक्ष का विपक्षी बन जाना लाजिमी है। पिछले दिनों कुछ ही ऐसा ही हुआ। सूबे के एक दल ने शिक्षामित्रों के प्रकरण को उठा दिया।
30.1.17
बीटीसी परीक्षाओं पर संकट के बादल, BTC 2013 के तृतीय व चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाओं का मुहूर्त ही तय नहीं
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय बीटीसी 2013 के तृतीय व चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाओं का मुहूर्त ही तय नहीं कर पा रहा है। पिछले दिनों किसी तरह इम्तिहान की तारीखें घोषित हुईं, लेकिन चंद दिनों में ही उस पर भी रोक लगा दी गई है। अभ्यर्थी यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर विलंब से चल रहा सत्र पूरा होने का नाम क्यों नहीं ले रहा है। वहीं, जो अभ्यर्थी अभी तक चौथे सेमेस्टर में पहुंचे ही नहीं, उनका प्रशिक्षण शुरू करा दिया गया है। 1प्रदेश में बीटीसी 2013 प्रथम व द्वितीय काउंसिलिंग के युवाओं का प्रशिक्षण
पूरा हो चुका है। यह अभ्यर्थी शिक्षक बनने की दौड़ में शामिल हो गए हैं लेकिन तृतीय काउंसिलिंग के अभ्यर्थियों का हाल बुरा है। उनकी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा अगस्त-सितंबर 2016 में हुई। दिसंबर 2016 में ही तीसरे सेमेस्टर का इम्तिहान होना था लेकिन काफी विलंब के बाद उसका कार्यक्रम पिछले दिनों जारी किया गया। दो दिन बाद ही उस पर रोक लगा दी गई है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षाएं रोकने की स्पष्ट वजह बताने की जगह अपरिहार्य कारण गिनाया है। कई मर्तबा तृतीय सेमेस्टर के अभ्यर्थी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करके जल्द परीक्षा कराने की मांग कर चुके हैं। प्रदेश में ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब तीन से चार हजार है। अभ्यर्थियों को चौथे सेमेस्टर में एक माह तक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाना होता है।
पूरा हो चुका है। यह अभ्यर्थी शिक्षक बनने की दौड़ में शामिल हो गए हैं लेकिन तृतीय काउंसिलिंग के अभ्यर्थियों का हाल बुरा है। उनकी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा अगस्त-सितंबर 2016 में हुई। दिसंबर 2016 में ही तीसरे सेमेस्टर का इम्तिहान होना था लेकिन काफी विलंब के बाद उसका कार्यक्रम पिछले दिनों जारी किया गया। दो दिन बाद ही उस पर रोक लगा दी गई है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षाएं रोकने की स्पष्ट वजह बताने की जगह अपरिहार्य कारण गिनाया है। कई मर्तबा तृतीय सेमेस्टर के अभ्यर्थी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करके जल्द परीक्षा कराने की मांग कर चुके हैं। प्रदेश में ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब तीन से चार हजार है। अभ्यर्थियों को चौथे सेमेस्टर में एक माह तक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाना होता है।
एलटी सवंर्ग के खाली पदों का ब्यौरा तलब: जिला विद्यालय निरीक्षकों को जारी किए निर्देश
संयुक्त शिक्षा निदेशक दीप चंद ने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से राजकीय हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेजों में एलटी संवर्ग के रिक्त पदों का ब्यौरा मांगा है। उन्होंने पत्र जारी कर एक सप्ताह में यह विवरण
उपलब्ध कराने केनिर्देश दिए हैं। जेडी के मुताबिक सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पुरुष व महिला सवंर्ग की अलग-अलग सूचनाएं अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) उप्र नियुक्ति एलटी अनुभाग, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय एवं जेडी कार्यालय में भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में जल्द ही सहायक अध्यापक स्नातक वेतन क्रम (महिला, पुरुष) में 9342 पदों पर शिक्षकों के लिए भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 26 जनवरी तक मांगे गए थे।
उपलब्ध कराने केनिर्देश दिए हैं। जेडी के मुताबिक सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पुरुष व महिला सवंर्ग की अलग-अलग सूचनाएं अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) उप्र नियुक्ति एलटी अनुभाग, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय एवं जेडी कार्यालय में भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में जल्द ही सहायक अध्यापक स्नातक वेतन क्रम (महिला, पुरुष) में 9342 पदों पर शिक्षकों के लिए भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 26 जनवरी तक मांगे गए थे।
स्कूल में एक पौधा लगाओ, प्रवेश पाओ, राजकीय इंटर कॉलेज में तीन माह से चल रही अनोखी मुहिम
राजकीय इंटर कॉलेज में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी शुरू हुई है। जो छात्र बिना किसी सूचना के कॉलेज से गैर हाजिर रहता है उसका नाम काट दिया जाता है। दोबारा प्रवेश पाने के लिए उसे एक पौधा लाकर कॉलेज परिसर में लगाना होता है। इसका उद्देश्य छात्र को गलती का एहसास करने के साथ ही उसे पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। 1विगत तीन माह से कॉलेज में यह मुहिम चल रही है। कक्षा 12 के छात्र
अभिषेक कुमार, दिनकर उपाध्याय, मिथिलेश सिंह, उबैद उल्ला सिद्दीकी, कक्षा नौ के छात्र अभय साहू, दिनेश कुमार, संजय मिश्र, फैजल खान, मोहम्मद परवीन व अवधेश प्रताप सिंह समेत कई कक्षाओं के छात्र बिना सूचना के छुट्टी पर चले गए थे। वापस आने पर छात्रों को बताया गया कि दोबारा प्रवेश पाने के लिए उन्हें कॉलेज में पौधा लगाना पड़ेगा। छात्रों ने पौधरोपण किया जिसके बाद उनको प्रवेश दिया गया। प्रधानाचार्य डीके सिंह का कहना है कि एक माह का अवकाश स्वीकृत करना तो प्रधानाचार्य के अधिकार में ही होता है। इस से उसका नाम कटने से बचेगा।राजकीय इंटर कालेज में छात्रों द्वारा लगाए गए पौधों को दिखाते प्रधानाचार्य डीके सिंह।
आसानी से नहीं मिलती छुट्टी
इलाहाबाद : छुट्टी लेने के छात्र को अपने कक्ष निरीक्षक के पास कारण सहित प्रार्थना पत्र देना होता है। इसके बाद उसे छुट्टी दी जाती है। लंबी छुट्टी हासिल करने के लिए छात्र को प्रिंसिपल से स्वीकृत लेनी आवश्यक होती है। अगर विद्यार्थी बिना बताए स्कूल नहीं आ रहा तो उसका नाम काट दिया जाता है। प्रिंसिपल के संज्ञान में आने के बाद ही वह प्रवेश पा सकता है। 1रोज होती है हाजिरी की जांच 1इलाहाबाद : कक्षाओं में बच्चों की हाजिरी लग रही है या नहीं प्रिंसिपल प्रतिदिन हाजिरी रजिस्टर की जांच करते हैं। तीन दिन से अधिक कोई छात्र के नहीं आने पर उसके नहीं आने का कारण संबंधित कक्ष निरीक्षक से पूछताछ की जाती है।
अभिषेक कुमार, दिनकर उपाध्याय, मिथिलेश सिंह, उबैद उल्ला सिद्दीकी, कक्षा नौ के छात्र अभय साहू, दिनेश कुमार, संजय मिश्र, फैजल खान, मोहम्मद परवीन व अवधेश प्रताप सिंह समेत कई कक्षाओं के छात्र बिना सूचना के छुट्टी पर चले गए थे। वापस आने पर छात्रों को बताया गया कि दोबारा प्रवेश पाने के लिए उन्हें कॉलेज में पौधा लगाना पड़ेगा। छात्रों ने पौधरोपण किया जिसके बाद उनको प्रवेश दिया गया। प्रधानाचार्य डीके सिंह का कहना है कि एक माह का अवकाश स्वीकृत करना तो प्रधानाचार्य के अधिकार में ही होता है। इस से उसका नाम कटने से बचेगा।राजकीय इंटर कालेज में छात्रों द्वारा लगाए गए पौधों को दिखाते प्रधानाचार्य डीके सिंह।
आसानी से नहीं मिलती छुट्टी
इलाहाबाद : छुट्टी लेने के छात्र को अपने कक्ष निरीक्षक के पास कारण सहित प्रार्थना पत्र देना होता है। इसके बाद उसे छुट्टी दी जाती है। लंबी छुट्टी हासिल करने के लिए छात्र को प्रिंसिपल से स्वीकृत लेनी आवश्यक होती है। अगर विद्यार्थी बिना बताए स्कूल नहीं आ रहा तो उसका नाम काट दिया जाता है। प्रिंसिपल के संज्ञान में आने के बाद ही वह प्रवेश पा सकता है। 1रोज होती है हाजिरी की जांच 1इलाहाबाद : कक्षाओं में बच्चों की हाजिरी लग रही है या नहीं प्रिंसिपल प्रतिदिन हाजिरी रजिस्टर की जांच करते हैं। तीन दिन से अधिक कोई छात्र के नहीं आने पर उसके नहीं आने का कारण संबंधित कक्ष निरीक्षक से पूछताछ की जाती है।
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