18.8.17

अब आर-पार के बाद ही काम पर लौटेंगे शिक्षामित्र

जागरण संवाददाता, बलिया : शिक्षामित्रों ने अपने प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर गुरुवार को बीएसए कार्यालय पर प्रदेश सरकार की वादाखिलाफी के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया। इस दौरान पूर्व के आंदोलन से भी और जोश व उत्साह में जनपद के विभिन्न शिक्षा क्षेत्रों से पहुंचे शिक्षामित्रों की भीड़ से बीएसए कार्यालय का परिसर छोटा पड़ गया।

शिक्षामित्रों की एकजुटता से कार्यालय पर पूरे दिन अफरातफरी की स्थिति रही। गौरतलब है कि 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेरोजगार हुए शिक्षामित्रों ने आंदोलन का राह पकड़ लिया था। इसको लेकर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान करने के लिए 15 दिन का समय मांगा, लेकिन समयावधि में शिक्षामित्रों के हित में कोई निर्णय नहीं लिया। इससे आक्रोशित शिक्षामित्रों ने जिला मुख्यालयों पर तीन दिन का सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ किया। गुरुवार को बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्रों के आंदोलन में कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया। शिक्षामित्रों ने कहा कि सूबे की भाजपा सरकार शिक्षामित्रों को अंधेरे में रखकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना चाहती है, जो घोर अन्याय है। सरकार के इस कृत्य के खिलाफ शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे। जिला मुख्यालय पर तीन दिन के सत्याग्रह आंदोलन के बाद बलिया से 3000 की संख्या में महिला-पुरुष शिक्षामित्र लखनऊ में आंदोलन के लिए कूच करेंगे। कहा शिक्षामित्र राजनीति करने नहीं आए हैं बल्कि हमें न्याय चाहिए। इस बार सरकार से आरपार कर ही शिक्षामित्र वापस काम पर लौटेंगे। धरना में राजेश साहनी, काशीनाथ यादव, सरल यादव, जितेंद्र राय, पंकज ¨सह, सूर्य प्रकाश यादव, श्यामनंदन मिश्र, परशुराम यादव, अनिल मिश्रा, नीतू उपाध्याय, मधु ¨सह, वसुंधरा राय, संतोष आदि मौजूद थे। अध्यक्षता ज्ञानप्रकाश मिश्र व संचालन अनिल मिश्र व संगम अली ने संयुक्त रूप से किया। आभार व्यक्त जिला संयोजक पंकज कुमार ¨सह ने किया।
लाठी-गोली का नहीं भय
शिक्षामित्रों के सत्याग्रह आंदोलन में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ ¨सह ने कहा कि शिक्षकों को सरकार धमकी न दे। शिक्षक भारत के भविष्य बनाने का काम करते हैं। उन्हें लाठी और गोली का कोई भय नहीं होता। शिक्षक जिस सरकार के खिलाफ मूड बना लेते हैं, उस सरकार का भविष्य और उम्र बहुत कम हो जाता है। आगाह किया है कि प्रदेश सरकार शिक्षकों से उलझने का काम ना करें। हमने कई सरकारों को उखाड़ फेंका है जिससे प्रदेश सरकार को सबक लेनी चाहिए। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश ¨सह ने कहा कि अब शिक्षामित्र करो या मरो की लड़ाई लड़ेंगे, क्योंकि आज उनके ऊपर जो संकट आया है इससे बड़ा कोई और संकट नहीं हो सकता। कहा यदि जल्द ही शिक्षामित्रों का समायोजन कर उनका सम्मान वापस नहीं किया गया तो बलिया का आंदोलन सरकार की आंखें खोलने का काम करेगा।
सरकार को कर देंगे मजबूर
शिक्षामित्रों के सत्याग्रह आंदोलन में समर्थन देने के लिए पहुंचे कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष राजेश पांडेय ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में जब-जब भाजपा सरकार आई है, तब-तब र्किमयों का उत्पीड़न शुरू किया है। इस सरकार में काम करने के बाद भी वेतन और अपने हक की लड़ाई के लिए र्किमयों को सड़क पर उतरना पड़ता है। कहा कि यह आंदोलन सरकार को अपना रवैया बदलने के लिए मजबूर कर देगा।
आज निकालेंगे जुलूस
समायोजन बहाली की मांग को लेकर हजारों शिक्षामित्र 18 अगस्त को बीएसए कार्यालय में एकत्र होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकालेंगे। साथ ही प्रदेश सरकार को अपना वादा पूरा करने की मांग संबंधित मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे। इसकी जानकारी शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष समिति के जिला संयोजक पंकज कुमार ¨सह व सह संयोजक सूर्य प्रकाश यादव ने दी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मांगा राज्य कर्मचारी का दर्जा: मांगे पूरी न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी

जागरण संवाददाता, लखनऊ : आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के तत्वावधान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। गुरुवार को हजरतगंज स्थित जीपीओ पार्क पर एकत्रित होकर उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र दिया।

एसोसिएशन की प्रदेश महामंत्री प्रभावती ने बताया कि पिछले महीने हुई संगठन और मुख्यमंत्री की वार्ता के बाद मुख्यमंत्री द्वारा किया गया वादा पूरा नहीं हुआ। जिससे आंगनबाड़ी कर्मचारी अपने आप को आपेक्षित महसूस कर रही हैं। इस मौके पर बाल विकास विभाग के महानिदेशक ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों से मिलकर उनसे मांगपत्र लिया। कर्मचारियों ने सरकार को 17 सितंबर तक का समय दिया है। इसके बाद राज्यव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं इस धरने में शामिल हुईं।
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से शासन द्वारा पिछले समझौतों को पूरा करने की मांग की। संघ की ओर से प्रदेश के जिलों व मुख्यालयों में धरना दिया गया। इस मौके पर काफी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। संघ की महामंत्री नीलम पांडे ने बताया कि शासन ने 30 जून को समझौता करने के बाद अभी तक उसे पूरा नहीं किया। इससे पूर्व भी छह लिखित समझौते किए गए, लेकिन कोई भी पूरा नहीं किया गया। महिलाओं ने आंगनबाड़ी के मानदेय 15 हजार कराने की मांग के अलावा एक माह की छुट्टी, मुख्यमंत्री से वार्ता, सुपरवाइजर में कोटा आदि की मांग की। वहीं उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकत्री सहायिका संघ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय धरने के दूसरे दिन भी काफी संख्या में महिला एकत्रित हुईं। संघ की प्रदेश अध्यक्ष किरन वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी सहायिकाओं, कार्यकर्ता व मिनी आंगनबाड़ी को नियमित मानदेय, ईपीएफ, नई पेंशन आदि मांगों पर शासन से जल्द विचार करने की मांग की है। इस मौके पर मीरा अवस्थी, रमा, शैल, सरला, प्रीति, नीरज, सरिता, साधना आदि मौजूद रहीं।

शिक्षामित्रों का कूच: 21 को लखनऊ, 25 को दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन

शिक्षामित्रों की सरकार से वार्ता विफल होने पर मंडलभर के शिक्षामित्रों ने एक बार फिर से आंदोलन की राह पकड़ ली है। जिससे शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे कई प्राथमिक स्कूलों पर फिर से ताले लटक गए हैं। बिजनौर में शिक्षामित्रों ने डीएम आफिस पर किया जोरदार प्रदर्शन। बरेली के जिला अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि 
17, 18 और 19 अगस्त को बीएसए दफ्तर पर और 21 अगस्त को लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में सत्याग्रह किया जायेगा। इसके बाद शिक्षामित्र 25 अगस्त दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन करेंगे।
बरेली में प्रशासन से सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के कारण शिक्षामित्रों ने गुरुवार से दुबारा अपना आंदोलन शुरू किया। इस कारण 250 से ज्यादा स्कूलों में ताले लटक गए। स्कूल बंद होने के कारण एक बार फिर से बच्चों को एमडीएम नहीं मिल पायेगा। शिक्षामित्रों ने इस बार अपने आंदोलन को सत्याग्रह का नाम दिया है। गुरूवार को सुबह 10 बजे से बीएसए दफ्तर में तिरंगा लगाकर सत्याग्रह शुरू कर दिया गया था। इस बार भी महिला शिक्षामित्रों की संख्या काफी ज्यादा है। तेज गर्मी के बाद भी शिक्षामित्र पूरे दमखम से आंदोलन में जुटे हुए हैं।
वहीं मुरादाबाद समेत रामपुर, अमरोहा, संभल जिलों में गुरूवार को शिक्षण कार्य का बहिष्कार का सभी शिक्षामित्र आंदोलन में शामिल होने चले गए है। जिसकी वजह से शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटके देखने को मिले। पिछले दिनों सुप्रीमकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद से समायोजन रद कर दिया। जिसको लेकर गुस्साए शिक्षामित्रों ने शिक्षण का बहष्किार कर विद्यालय जाने से इंकार कर दिया। शिक्षामित्रों ने एक जुट होकर प्रदर्शन कर तरह-तरह से अपना विरोध भी जताया था।
करीब एक सप्ताह चले आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों से वार्ता की तथा आश्वासन देकर शिक्षा व्यवस्था को फिर से सुचारू करवाने का हुक्म दिया था। मगर एक बार फिर बुधवार को सरकार से वार्ता विफल रहने के बाद शिक्षामित्रों ने अपनी मांगों को लेकर गुरूवार को कार्य बहिष्कार कर विद्यालय जाने से साफ़ इंकार कर दिया तथा फिर से सरकार के फैसले का विरोध करने लगे। जिसकी वजह से शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे कई प्राथमिक विद्यालयों पर फिर से ताला लटक गया। इस संबंध में अभिभावकों व ग्रामीणों का कहना है की सरकार एवं शिक्षामित्रों की लड़ाई में मासूम बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।

प्रमुख सचिव का घेराव कर शिक्षामित्रों का हंगामा

फीरोजाबाद : समायोजित शिक्षामित्रों ने गुरुवार को मुख्यालय पर जमकर हंगामा काटा। प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन देने पहुंचे शिक्षामित्र काफी देर तक उनके सभाकक्ष से बाहर न आने पर भड़क गए। नारेबाजी के दौरान एक महिला शिक्षामित्र बेहोश हो गई। इसे आनन-फानन में अधिकारी उपचार के लिए लेकर दौड़े। इसके बाद शिक्षामित्रों का आक्रोश भड़क गया। मौके को देख प्रमुख सचिव खुद बैठक छोड़कर बाहर आए तथा शिक्षामित्रों से ज्ञापन लेकर उन्हें आश्वासन दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक पद से हटाए गए समायोजित शिक्षामित्रों ने फिर से मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया है। तीन दिन से धरना दे रहे शिक्षामित्रों को जब गुरुवार को मुख्यालय पर प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश सरकार जितेंद्र ¨सह द्वारा बैठक करने की जानकारी मिली तो उनके घेराव की योजना बनाई। धरना स्थल से उठकर 11 बजे शिक्षामित्र कलक्ट्रेट सभागार के बाहर पहुंच गए। अंदर प्रमुख सचिव प्रशासन के साथ बैठक कर रहे थे। शिक्षमित्रों ने बाहर हंगामा शुरू कर दिया। साढ़े 12 बजे तक सचिव के बाहर न आने पर शिक्षामित्र भड़क गए। तीखी नारेबाजी करने लगे। इस दौरान धूप एवं गर्मी से शिक्षामित्रों की तबियत खराब होने लगी। राधा वर्मा तो बेहोश होकर गिर गई। महिला शिक्षामित्र के बेहोश होते ही शिक्षामित्र गुस्सा गए। तीखी नारेबाजी शुरू कर दी। सिटी मजिस्ट्रेट ने अपनी गाड़ी से महिला शिक्षामित्र को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। इधर धर्मेंद्र कुशवाहा सहित अन्य शिक्षामित्रों की भी तबियत खराब हो गई। इन्हें साथियों ने छांव में बैठाया। हंगामा बढ़ने की खबर अंदर पहुंची तो पुलिस अधिकारियों ने बाहर आकर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद प्रमुख सचिव बाहर आए तथा शिक्षमित्रों का ज्ञापन लिया। शिक्षामित्रों ने सम्मान लौटाने की मांग की। ज्ञापन देने के बाद शिक्षामित्र वापस धरना स्थल पर पहुंच गए। जहां शाम पांच बजे तक धरना जारी रहा।
नौकरी नहीं तो फांसी दो..:
शिक्षामित्र तीखी नारेबाजी कर रहे थे। शिक्षक पूरा नाम चाहिए, भीख नहीं सम्मान चाहिए.. जैसे नारों के साथ में योगी सरकार के भी खिलाफ जमकर गरजे। धरना प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम में श्रीओम यादव, नीरज चौहान, राजेश कुमार, धर्मेंद्र कुशवाहा, चंद्रभान वर्मा, मान ¨सह, साहूकार, संदीप राजपूत, रामेश्वर ¨सह तोमर, श्रीपाल ¨सह, सीता देवी, वंदना शर्मा, आकांक्षा शर्मा, कुसुम वर्मा, प्रेमवती यादव आदि उपस्थित थे।
जो स्कूल जा रहे हैं, उनकी होगी तलाश :
समायोजित शिक्षामित्रों के धरने में जिले के 90 फीसद शिक्षामित्र आ रहे हैं। असमायोजित शिक्षामित्र भी गुरुवार को काफी संख्या में धरना स्थल पर पहुंचे। इधर इसके बाद भी कई शिक्षामित्र ऐसे हैं जो धरना स्थल पर नहीं आ रहे। कुछ के स्कूल जाने के संबंध में भी सूचनाएं मिल रही हैं। धरना स्थल पर भी यह मुद्दा गूंजा। मंच से कहा गया कि जो भी हमारे भाई स्कूल जा रहे हैं वह स्कूल न जाएं। उन्होंने स्कूल जाना बंद नहीं किया तो फिर शिक्षामित्र स्कूलों में पहुंच कर उन्हें जबरन रोकेंगे।