29.1.17

केंद्रीय विद्यालय के छात्रों पर सालाना 33 हजार खर्च

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली 1केंद्रीय विद्यालय अपने प्रत्येक छात्र पर सालाना करीब 33 हजार रुपये खर्च करता है। जबकि विद्यालय औसतन साढ़े पांच हजार रुपये ही छात्रों से वसूलता है। छात्रों से मिलने वाली रकम का अधिकांश हिस्सा विद्यालय विकास निधि से हासिल होता है। सरकार इन स्कूलों के लिए संसाधन जुटाने के लिए कुछ नए प्रस्तावों पर विचार कर रही है। 1मानव संसाधन विकास मंत्रलय के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक इस समय देश भर के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे 12 लाख से अधिक छात्रों में से प्रत्येक की पढ़ाई पर प्रति
वर्ष 32,698 रुपये खर्च होते हैं। इनमें से प्रत्येक छात्र से सालाना लगभग साढ़े पांच हजार रुपये विद्यालय विकास निधि के रूप में हासिल होते हैं। केंद्रीय विद्यालयों में एडमीशन फीस, ट्यूशन फीस और कंप्यूटर फीस बहुत मामूली है। जबकि विद्यालय विकास निधि के तौर पर प्रति माह छात्र से पांच सौ रुपये लिए जाते हैं। अधिकांश तरह के शुल्कों से दलित, आदिवासी और लड़कियों को छूट है। इसी तरह गरीबी रेखा के नीचे के परिवार के बच्चों की भी कंप्यूटर फीस छोड़ कर सभी फीस माफ है। इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर तो बहुत अच्छा माना जाता है, मगर शिक्षण के अतिरिक्त सुविधाओं को और विकसित किए जाने की जरूरत देखी जा रही है। ऐसे में केंद्र इनके लिए धन जुटाने के अतिरिक्त साधनों पर विचार कर रही है। यह तरीका क्या हो सकता है, यह पूछे जाने पर अधिकारी कहते हैं कि कई तरह के प्रस्तावों पर विचार हो रहा है।

शिक्षण संस्थाओं को रखें राजनीति से दूर, आपका मत आपका मुद्दा

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अटके शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर संशय, बेसिक शिक्षा अधिकारी आचार संहिता की आड़ लेकर आवंटन कार्य रोके

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : विधानसभा चुनाव घोषणा के ठीक पहले हुए 65 शिक्षकों के तबादले रोक दिए गए हैं, लेकिन किसी का ध्यान उन ढाई हजार से अधिक शिक्षकों पर नहीं जा रहा है, जिनके तबादले चुनाव घोषणा से चंद दिन पहले हुए थे। कुछ जिलों को छोड़कर उनमें से अधिकांश शिक्षकों को अब तक विद्यालयों का आवंटन नहीं हो सका है। ऐसे में ये शिक्षक किस तरह से चुनाव में ड्यूटी कर सकेंगे का जवाब किसी के पास नहीं है। बेसिक शिक्षा अधिकारी आचार संहिता की आड़ लेकर आवंटन कार्य रोके हैं। आयोग ने भी इन तबादलों का
अभी तक संज्ञान नहीं लिया है। 1प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा के पहले अफसर व कर्मचारियों के खूब तबादले हुए हैं। इसमें जिले के अंदर से लेकर अंतर जिला तक शामिल हैं। बीते तीन जनवरी को शासन ने 65 परिषदीय शिक्षकों का एक से दूसरे जिले में तबादला किया। इसे चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और परिषद के अफसरों से जवाब तलब किया। 1आयोग ने परिषद से पूछा कि सूबे में बूथ लेबल अधिकारियों के रूप में कार्य कर रहे अध्यापकों के स्थानांतरण के बाद जिलेवार कितने पद रिक्त होंगे और रिक्त पदों पर अध्यापकों को कब तक नियुक्त किया जाएगा। इस पर परिषद सचिव संजय सिन्हा ने बीते 23 जनवरी को ही बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर तबादला आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही सभी जिलों से रिक्त पदों की रिपोर्ट भी मांग ली। हालांकि शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शिक्षकों के तबादले पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

28.1.17

जो लोग स्वस्थ नही है अपनी ड्यूटी कटाना चाहते है उन लोगो के लिए आवश्यक

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