20.3.17

शिक्षामित्र मात्र एक संविदा अनुबंध है: कोर्ट ने शिक्षामित्र पद नहीं किया परिभाषित, जानिए क्या है क़ानूनी पेंच

अब तक हुई चर्चा में हमारी पोस्ट की जिस बात को घोर आपत्तिजनक माना गया वो है "कोर्ट ने शिक्षामित्र पद परिभाषित नहीं किया" हम ने वर्ष 2003 से लेकर 2015 तक शिक्षामित्रों से सम्बंधित लगभग 400 से अधिक
केसेस का अध्ययन किया जिन में अगस्त 2013 और सितम्बर 2015 के पूर्ण पीठ के फैसले सहित 2 जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं।

इन सभी मुकद्मो में (12 सितम्बर 2015 के फैसले के अलावा )सब से ख़ास बात ये रही कि ये सभी 99% मुकद्दमे उनके द्वारा दाखिल किये गए जो शिक्षामित्र नहीं थे। और इन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं था कि ये योजना है परियोजना है संविदा है अनुबंध है या क्या है।
यही कारण था कि शिक्षामित्र पद की कोर्ट ने राज्य सरकार के हिसाब से उसके मन मुताबिक व्यख्या की। कारण ये भी था कि राज्य सरकार नहीं चाहती थी कि शिक्षामित्र स्थाई नौकरी की मांग करें या उसे वेतन देना पड़े। और इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने अनुच्छेद 162 की शक्ति का प्रयोग कर हमें अनुबंधित किया था जैसा कि अगस्त 2013 और सितम्बर 2015 में भी कोर्ट के द्वारा कहा गया।
✍🏼अब बात मुद्दे की कि जब हम कहते हैं कि शिक्षामित्र पद परिभाषित नहीं किया गया इस का क्या अर्थ है।
आइये समझते हैं।
इसे समझने के लिए शिक्षामित्र पद के पड़ावों पर नज़र डालते हैं
पहला पड़ाव 26 May 1999
दूसरा पड़ाव 31 July 2001
तीसरा पड़ाव 2 june 2010
⚖तीसरे पड़ाव 2 जून 2010 तक तो शिक्षामित्र पद अनुच्छेद 162 के अधीन आता है जिस के लिए 400 मुकदमों में shikshamitras are  teachers hired on contract basis. कहा गया। लेकिन 2 जून 2010 से
चौथा पड़ाव 25 जनवरी 2011 तक की स्थिति की कोई व्याख्या किसी कोर्ट केस में नहीं पाई जाती है।
अगर किसी भी विधिक जानकार की जानकारी में हो तो वो अपनी पोस्ट में ज़रूर लिखे।
⚖ 2 जून 2010 से 25 जनवरी 2011 के बीच और इस के बाद
पांचवा पड़ाव 27 जुलाई 2011 तक कोई भी केस जो हाई कोर्ट में चला हो इस पर प्रकाश नहीं डालता। अगस्त 2013 के पूर्ण पीठ के फैसलेमें भी 2 जून 2010 तक ही बहस को सिमित रखा गया है।
✍🏼मज़े की बात ये कि 12 सितम्बर 2015 को भी 2013 के मुक़दमे को ही आधार बनाया गया जबकि वो मुकदमा सिर्फ 2 जून 2010 तक के शिक्षामित्र पद की ही व्याख्या करता है। साथ ही ये भी कि ये फैसला भी उनके लिए था जो शिक्षामित्र नहीं थे।
⚖अब अंत में हर उस विधिक जानकार से पूछना चाहता हूँ जो शिक्षामित्र पद को कोर्ट द्वारा परिभाषित बताते हैं। वो बताएं‼
क्या शिक्षामित्र पद की संविदा के सम्बन्ध में अनुच्छेद 309 के परिप्रेक्ष्य में किसी भी केस में बहस हुई❓
क्या किसी भी मुक़दमे में भारतीय संविदा अधिनियम 1872 के आधार पर बहस हुई❓
क्या किसी भी मुक़दमे में संविदा नियमन अधिनियम पर बहस हुई❓
क्या किसी भी मुक़दमे में शिक्षामित्र जीवन के संदर्भ में अनुच्छेद 21 पर बहस हुई❓ वो भी तब जब देश में 2002 से 21 (क) को लागू किया जा चूका है।
✍🏼जब 2002 से लेकर 2015 तक उपरोक्त पर कोई बहस या कोई तथ्य पेश ही नहीं हुए तो सिर्फ राज्य सरकार के कह देने भर से क्या शिक्षामित्र पद परिभाषित हो जायेगा। जबकि 2002 से अब तक कानूनों में कितने बदलाव आ चुके हैं। ऐसे में हम पुनः दोहराते हैं:-
शिक्षमित्र संविदा कर्मी नहीं हैं वे शिक्षक हैं। बाकी आप सुप्रीम कोर्ट को तै करने दीजिये

जो अभ्यर्थी TET पास हैं, उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जा सकता: शिक्षामित्रों के लिए पेश वकील मीनेश दुबे की दलील

लखनऊ। शिक्षामित्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने खुशखबरी दी है, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों की याचिका पर 23 नवंबर तक उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक बरकरार रखते हुए अंतरिम राहत जारी रखी है। जिससे पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है।

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट पिछले वर्ष से इस मामले पर कार्य कर रहा है। जिसके अन्तर्गत 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन पर रोक लगा दी थी और 6 दिसम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर स्टे दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था कि अब किसी को अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी और केस में अंतिम बहस होगी। कोर्ट के आदेश पर गत वर्ष 1,37,000 शिक्षामित्रों को समायोजित कर उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक के पद पर लिया गया है। शिक्षामित्रों के लिए पेश वकील मीनेश दुबे की दलील है कि जो छात्र TET पास हैं, उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जा सकता।

19.3.17

बीएड टीईटी पास की की लड़ाई केशव प्रसाद मौर्या जी ने बताया बीजेपी की लड़ाई

9342 एलटी शिक्षक भर्ती के लिए बुलाएंगे दोगुना अभ्यर्थी, चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया होगी शुरू

9342 एलटी भर्ती के लिए बुलाएंगे दोगुना अभ्यर्थी
इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता

राजकीय विद्यालयों में 9342 एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती के लिए काउंसिलिंग में एक सीट पर दो अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा। चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।सूत्रों के अनुसार नियुक्ति के लिए काउंसिलिंग शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद में ही कराई जाएगी। अभ्यर्थियों की मेरिट के अनुसार जैसे-जैसे दस्तावेजों का सत्यापन होता जाएगा, उन्हें नियुक्ति पत्र जारी करते जाएंगे। भर्ती के लिए 26 दिसंबर से 26 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। इसके लिए 6,23,917 अभ्यर्थियों ने बैंक में फीस जमा की थी। लेकिन 5,25,658 आवेदक ही अंतिम रूप से फार्म भर सके थे। इस भर्ती में महिला शाखा के 4879 जबकि पुरुष शाखा के 4463 कुल 9342 पद हैं। पहली बार 1548 कम्प्यूटर शिक्षकों की सीधी भर्ती की जा रही है। इनमें महिला शाखा के 775 और पुरुष शाखा के 773 पद हैं। इस भर्ती के लिए अक्तूबर में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (चतुर्थ संशोधन) नियमावली 2016 को कैबिनेट ने मंजूर दी थी।