27.3.17

अनुदेशक साथियों का मानदेय 8470 रू से बढ़ाकर 17000 रू कर दिया गया है ((नीरज पाण्डेय प्रदेश प्रवक्ता उo प्राo अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन))

सम्मानित अनुदेशक साथियों :-
सभी अनुदेशक साथियों को हमारा प्यार भरा नमस्कार। आज खुशी इस बात की है कि हम सभी अनुदेशक साथियों का मानदेय 8470 रू से बढ़ाकर 17000 रू कर दिया गया है। साथियों उo प्राo अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन उo प्रo के प्रदेश पदाधिकारियों खासकर प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला जी, महासचिव भोलानाथ पाण्डेय जी व उनकी पूरी टीम (महेन्द्र पाठक जी, विक्रम सिंह जी, प्रियंक मिश्रा जी, विशाल श्रीवास्तव जी आदि) के अथक प्रयासों को हम झुककर सलाम करते हैं कि हम सभी के मानदेय बढ़ोत्तरी के लिए इतनी कड़ी मेहनत की। साथ ही महीनों से अपने घरबार को छोड़ कर जिस त्याग का परिचय दिया है हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। आज भोला भाई की सूझबूझ और तेजस्वी भाई के जुझारू कार्यप्रणाली से हम इस मुकाम को हांसिल करने में सफल हुए हैं। साथ ही हम इसके लिए भाजपा के नेताओं व सभी अधिकारियों को चाहे वे प्रदेश स्तर के हों या केन्द्र के हों सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं व आभार प्रकट करते हैं।
साथ ही क्रेडिट लूटने वाले संगठन पर अभी हमारा कोई टिप्पणी करने का मूड नहीं है क्योंकि मन को खिन्न नहीं करना चाहता हूँ।
संगठन पर आस्था व विश्वास बनाये रखने के लिए सभी अनुदेशक साथियों का धन्यवाद !
आपका शुभचिंतक
नीरज पाण्डेय
प्रदेश प्रवक्ता
उo प्राo अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन

अब बिना आधार कार्ड वाले बच्चों को भी मिल सकेगा मिड-डे मील

केंद्र सरकार ने आज स्पष्ट रूप से कहा कि मध्याह्न भोजन योजना से लाभान्वित होने वाले विद्यार्थियों को में इस सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी लाभार्थियों को मध्याह्न भोजन के साथ-साथ 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या भी मिल सके।

शून्यकाल के दौरान यह आश्वासन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी लाभार्थी आधार कार्ड के अभाव में मध्याह्न भोजन की सुविधा से वंचित नहीं होगा। सभी लाभार्थियों को यह सुविधा मिलेगी और जिन विद्यार्थियों के पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें यह मुहैया कराया जाएगा।
जावड़ेकर ने यह आश्वासन कांग्रेस के मोतीलाल वोरा द्वारा मध्याह्न भोजन योजना के लाभ के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने संबंधी मुद्दा उठाए जाने पर दिया।
वोरा ने कहा था कि सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया है, जिससे लगता है कि सरकार विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन की सुविधा नहीं देना चाहती।
वोरा ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना इसलिए शुरू की गई थी कि अधिक से अधिक संख्या में विद्यार्थी पढ़ने के लिए स्कूल आएं। इस योजना के तहत करीब 12 करोड़ विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। पहले राजग ने आधार का विरोध किया था लेकिन अब उसने मध्याह्न भोजन योजना के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया है।
वोरा ने कहा कि यह कदम उठाने से पहले सरकार को पता लगाना चाहिए था कि आधार वाले बच्चों की संख्या कितनी है। वोरा ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि सरकार विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन की सुविधा नहीं देना चाहती।
जावड़ेकर ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सभी लाभार्थियों को मध्याह्न भोजन मिलेगा। मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि कोई भी विद्यार्थी मध्याह्न भोजन योजना से वंचित नहीं रह पाएगा। सभी को इसका लाभ मिलेगा और जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें आधार कार्ड मुहैया कराया जाएगा।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना के कई लाभार्थियों के पास आधार कार्ड है और जिन लाभार्थियों के पास यह कार्ड नहीं है उन्हें 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या मुहैया कराई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जहां आधार के लिए सुविधा नहीं हो सकती वहां राज्य सरकारें विद्यार्थियों को विशिष्ट नंबर मुहैया कराएंगी। जावड़ेकर ने कहा कि आधार कार्ड को मध्याह्न भोजन योजना से जोड़ने पर इस योजना के दुरूपयोग के मामलों में कमी आई है।

सरकारी योजनाओं के लाभ लिए आधार को अनिवार्य नहीं - सुप्रीमकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पष्ट किया कि सरकार और उसकी एजेंसियां सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं कर सकती हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर, न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ ने 
हालांकि यह भी कहा कि सरकार और उसकी एजेंसियों को गैर-कल्याणकारी कार्यों, जैसे कि बैंक खाता खुलवाने में आधार कार्ड मांगने से मना नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन सहित अन्य आधार पर आधार योजना को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर निणार्यक फैसला देने के लिए सात न्यायाधीशों वाली पीठ के गठन की आवश्यकता होगी।
हालांकि, न्यायालय ने सात न्यायाधीशों वाले पीठ के गठन पर असमर्थतता जताते हुए कहा कि इस पर फैसला बाद में होगा। याचिका दायर करने वालों मे से एक की ओेर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का सम्मान नहीं कर रही है कि आधार कार्ड का प्रयोग स्वैच्छिक होगा अनिवार्य नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त, 2015 को कहा था कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा और अधिकारियों को योजना के तहत एकत्र किए गए बायोमिट्रिक आंकड़े साझा करने से मना किया था।
हालांकि, 15 अक्तूबर, 2015 को उसने पुराने प्रतिबंध को वापस ले लिया और मनरेगा, सभी पेंशन योजनाओं भविष्य निधि, और राजग सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री जन-धन योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आधार कार्ड के स्वैच्छिक प्रयोग की अनुमति दे दी।

TET 2011 प्रकरण में संजय मोहन को सजा किस बात की मिली?: शिक्षामित्र संगठन ने उठाया बड़ा सवालिया प्रश्न

संजय मोहन जी को सजा किस बात की मिली? यह भी एक  बहस का मुद्दा बना हुआ है. यदि संजय मोहन जी दोषी हैं तो TET 2011 भी उतना ही दोषी है क्या ? और यदि TET 2011 सही है तो उन्हें रिहा किया जाए। यदि वो दोषी हैं  तो 72825 की भर्ती कहाँ तक सही है.

जब संजय मोहन को टीईटी 2011 में धांधली कराने के कारण सजा हो चुकी है तो क्या यह सिद्ध हो चुका है कि टीईटी २०११ फर्जी है ? तो फर्जी टीईटी पर भर्ती कैसे की जा रही है इसकी चर्चा की जाये.
अब  शिक्षामित्र संगठन इस बात को सुप्रीमकोर्ट कोर्ट के समक्ष रखेंगे.
संगठन का यह भी कहना है कि कोर्ट में ७ को सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा .