17.12.16

संविदा शिक्षकों ने मांगा विनियमितीकरण. समाज कल्याण निदेशालय पर जुटे संविदा शिक्षक

संविदा शिक्षकों ने मांगा विनियमितीकरण
-समाज कल्याण निदेशालय पर जुटे संविदा शिक्षक
- राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में तैनात हैं 776 शिक्षक
जागरण संवाददाता, लखनऊ: राजधानी समेत प्रदेश के सभी 82 आश्रम पद्धति विद्यालयों में तैनात 776 संविदा शिक्षकों ने शुक्रवार को समाज कल्याण निदेशालय के सामने धरना दिया। उन्होंने मांग पूरी होने तक आमरण
अनशन करने का एलान भी किया। शिक्षकों ने अधिकारियों पर हीलाहवाली करने का आरोप भी लगाया।
समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विद्यालयों में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर पढ़ाई का एलान के बाद प्राथमिक कक्षाओं को बंद करने का निर्णय प्राथमिक शिक्षकों पर भारी पड़ रहा है। समायोजन की मांग अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि संविदा शिक्षकों को विनियमितीकरण करने का आश्वासन समाज कल्याण विभाग के गले की फांस बन गया है। समाज कल्याण निदेशालय के विनियमितीकरण के प्रस्ताव को वित्त समिति ने अस्वीकार क्या किया, संविदा शिक्षकों में बेरोजगारी का भय व्याप्त हो गया। आश्रम पद्धति शिक्षक कल्याण समिति की अध्यक्ष आशा लता सिंह के आह्वान पर शिक्षकों ने निदेशालय पर डेरा जमा लिया। अध्यक्ष ने मांग पूरी होने तक आमरण अनशन की चेतावनी दी है। कोषाध्यक्ष राम बहादुर का कहना है कि संविदा शिक्षकों को विनियमित करने का प्रस्ताव शासन स्तर पर पास हो गया है। इसके बावजूद निदेशालय स्तर सही जानकारी न देने से वित्तीय समिति ने प्रस्ताव को वापस कर दिया। समाज कल्याण निदेशक ने शिक्षकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षक शासन से वार्ता कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।

कर्मियों को सातवें वेतन का नकद भुगतान फरवरी से

लखनऊ : प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों, राजकीय शिक्षकों, सहायताप्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों तथा राज्य के पेंशनर व पारिवारिक पेंशनरों, नगरीय स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों, जल संस्थानों, विकास प्राधिकरणों और स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों को सातवें वेतन का लाभ देने के लिए शुक्रवार को तीन अलग-अलग शासनादेश जारी कर दिए। बीते 12 दिसंबर को राज्य
सरकार ने कर्मचारियों व पेंशनरों को सातवें वेतन देने के बारे में राज्य वेतन समिति की पहली रिपोर्ट पर मुहर लगा दी थी।
राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों व पेंशनरों को सातवें वेतन का लाभ देने के बारे में जारी शासनादेश में कहा गया है कि पुनरीक्षित वेतन मैटिक्स में वेतन निर्धारण, वेतन समिति की सिफारिशों के अनुसार किया जाएगा। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के अनुसार जनवरी 2017 के वेतन का नकद भुगतान फरवरी में किया जाएगा। वहीं जनवरी से दिसंबर 2016 तक सातवें वेतन के एरियर का भुगतान आगामी दो वित्तीय वर्षों के दौरान दो समान वार्षिक किस्तों में किया जाएगा। एरियर की 80 फीसद राशि कार्मिक के जीपीएफ खाते में डाली जाएगी और 20 फीसद भाग में आयकर कटौती के बाद शेष का नकद भुगतान किया जाएगा। पेंशनरों को आगामी दो वर्षों में दिये जाने वाले एरियर का भुगतान नकद किया जाएगा। 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनरों को एरियर का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में किया जाएगा। नई पेंशन योजना से आच्छादित कार्मिकों को एरियर की रकम की 10 फीसद के बराबर धनराशि कार्मिक के टियर-1 पेंशन खाते में जमा की जाएगी तथा राज्य सरकार या नियोक्ता द्वारा समतुल्य अंशदान टियर-1 पेंशन खाते में जमा किया जाएगा। बची हुई 90 फीसद राशि कार्मिक को उसके विकल्प के आधार पर राष्ट्रीय बचत पत्र के रूप में या उसके पीपीएफ खाते में जमा कर दी जाएगी।



एलटी ग्रेड 9342 शिक्षक भर्ती पर लटकी तलवार,प्रदेश के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में 9342 पदों पर नियुक्ति का मामला हुआ गम्भीर

इलाहाबाद : प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में होने वाली स्नातक शिक्षक यानी एलटी ग्रेड भर्ती की घेराबंदी तेज हो गई है। इसका विरोध प्रतियोगियों का ही एक वर्ग कर रहा है, वहीं नियमों को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। इसी बीच शिक्षा निदेशालय के कर्मचारी भी भर्ती के नियम को लेकर विरोध में आ गए हैं। इससे तकरार बढ़ने के आसार हैं।
प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 9342 पदों के लिए एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती होनी है। शासन ने भर्ती नियमों में बदलाव किया है। अब नियुक्तियां मंडल के बजाए राज्य स्तर पर होंगी और नियुक्ति अधिकारी
संयुक्त शिक्षा निदेशक की जगह अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा की अगुआई में गठित कमेटी होगी। यह दो अहम बदलाव करके शासन एवं वरिष्ठ अधिकारी खुश थे, क्योंकि इससे मेरिट की अनदेखी नहीं होगी और वरिष्ठता की समस्या खत्म हो जाएगी। अफसरों की सोच से जमीनी हकीकत एकदम उलट है। प्रतियोगियों का एक वर्ग इस भर्ती के नियमों खासकर मेरिट के जरिए चयन के विरोध में खड़ा हो गया है। उसका कहना है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में इसी के समान नियुक्तियां लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद हो रही हैं और राजकीय कालेज में सिर्फ मेरिट से चयन होना ठीक नहीं है। सूबे के शासकीय व अशासकीय विद्यालयों के समान पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया एक जैसी होनी चाहिए। इस प्रकरण को लेकर एक गुट प्रदर्शन कर चुका है, वहीं दूसरा गुट 22 दिसंबर से शिक्षा निदेशालय में बेमियादी आंदोलन करने जा रहा है।
चयनित होने वाले एलटी ग्रेड शिक्षक कक्षा छह से आठ की कक्षाओं में भी पढ़ाएंगे, ऐसे में एनसीटीई की टीईटी योग्यता को हाशिए पर रखा गया है, क्योंकि नियुक्तियों में टीईटी उत्तीर्ण होने का कहीं जिक्र नहीं किया गया है। अब यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि आवेदन करने वाले टीईटी उत्तीर्ण जरूर हों। इसी बीच शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ भी इन भर्तियों के विरोध में आ गया है। अध्यक्ष रंगनाथ मिश्र का कहना है कि मेरिट से नियुक्ति होने पर धांधली और बढ़ेगी। यह भर्ती प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि विभागीय अफसरों की मंशा नियुक्तियां सही से कराने की नहीं है।
अभी विज्ञापन जारी होने में देर : राजकीय कालेजों के लिए एलटी ग्रेड शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन इस सप्ताह भी जारी होने के आसार नहीं है। यूपी डेस्को ने अभी वेबसाइट तैयार नहीं की है और ऑनलाइन आवेदन में बैंक के जरिए होने वाली ई-पेमेंट आदि की सुविधा शुरू करने में भी वक्त लगने के आसार हैं। माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश ने बताया कि अगले सप्ताह ही विज्ञापन जारी हो सकेगा।

बिना नियमावली होगी शिक्षक भर्ती, प्राथमिक स्कूलों में 16460 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला

ऐसा पहली बार हो रहा है कि भर्ती का एलान हुआ और शिक्षक बनने को लालायित युवा खामोश हैं। इसकी वजह भी आइने की तरह साफ है, लेकिन ताज्जुब यह है कि युवाओं को जो बात समझ आ रही है, सरकार जानते हुए भी उसे समझने को तैयार नहीं है। दरअसल, बेसिक शिक्षा की अध्यापक सेवा नियमावली 1981 का संशोधन इसी माह हाईकोर्ट ने रद कर दिया है। ऐसे में नई भर्तियां टीईटी मेरिट या फिर एकेडमिक मेरिट में से किसी के तहत होना संभव नहीं है। अब किस नियमावली के तहत होंगी यह स्पष्ट नहीं है।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2011 में कराई गई। सूबे की बसपा सरकार ने उस समय 72825 शिक्षकों की भर्ती करने के लिए अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में संशोधन किया, ताकि नियुक्तियां टीईटी मेरिट के अनुसार हो जाएं। यह भर्तियां नहीं हो सकीं। 2012 में समाजवादी पार्टी सत्ता में आ गई। सपा ने अध्यापक सेवा नियमावली में एकेडमिक मेरिट के आधार पर नियुक्तियां करने के लिए संशोधन कर दिया।
हालांकि हाईकोर्ट ने टीईटी मेरिट के आधार पर भर्तियां करने का आदेश दिया। इस आदेश के विरुद्ध प्रदेश सरकार ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की है और उसकी सुनवाई चल रही है। सरकार के इस कदम के विरोध में टीईटी मेरिट समर्थकों ने भी याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई करते हुए बीते एक माह के अंदर सहायक अध्यापक सेवा नियमावली 1981 का पहले 15वां संशोधन और फिर 16वां संशोधन रद कर दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि इसका अंतिम निर्णय शीर्ष कोर्ट करेगा। इस आदेश से एकेडमिक मेरिट के आधार पर पिछले वर्षो में हुई 99 हजार से अधिक भर्तियों पर तलवार लटकी है।
यह संकट सुलझाने के लिए शिक्षा विभाग के अफसर रास्ता तलाश रहे हैं। इसी बीच 16460 शिक्षकों की नई भर्तियों ने अफसरों की और परेशानी बढ़ा दी है, क्योंकि नई भर्तियां किस नियम के तहत कराई जाएं यह किसी को सूझ नहीं रहा है। वहीं गुरुवार को जारी शासनादेश में एक हफ्ते में भर्ती का कार्यक्रम जारी करने के निर्देश हुए हैं। ऐसे में बेसिक शिक्षा अफसर अब किस रास्ते आगे बढ़ेंगे अभी तय नहीं है।
प्रदेश में यह भर्तियां फंसी
भर्ती का नाम>>>>संख्या
बीटीसी उर्दू >>9770
बीटीसी व विशिष्ट बीटीसी 10800
उर्दू बीटीसी >>4280
विज्ञान गणित >>29334
बीटीसी, उर्दू बीटीसी >>10000
बीटीसी >> 15000
स्पेशल बीटीसी >>16448