29.12.16

छात्रों को मिलेगा नि:शुल्क स्मार्टफोन

इलाहाबाद : 18 वर्ष आयु से अधिक हाईस्कूल में पंजीकृत छात्र-छात्रओं के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजना के अंतर्गत स्कूलों में अध्यनरत छात्र-छात्रओं को निश्शुल्क स्मार्टफोन दिया जाएगा। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी पत्र के अनुपालन में यह आदेश विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधकों को जारी किया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक गोविंद राम ने बताया कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए अपर जिलाधिकारी को नोडल अफसर नामित किया गया है। बता दें कि प्रदेश में सपा सरकार के गठन के समय इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र-छात्रओंके लिए नि:शुल्क लैपटाप योजना शुरू की गई थी। हाईस्कूल के छात्रों को
टैबलेट देने की बात भी कही गई थी।

LT GRADE: पद व पाठयक्रम एक योग्यता अलग-अलग, प्रदेश के शासकीय और अशासकीय कालेजों में शिक्षक नियुक्ति की अर्हता बदली

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : पद एलटी ग्रेड यानी स्नातक शिक्षक। यहां माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से तय एक ही पाठ्यक्रम। और तो और वेतनमान तक समान है। यह अहम समानता होने के बाद भी उसे पढ़ाने वाले शिक्षकों के चयन की योग्यता अलग-अलग है। यह फासला होने की वजह शासकीय व अशासकीय में कालेजों का अलग-अलग होना है। शासकीय कालेजों में इन दिनों भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई है तो अशासकीय कालेजों के
आवेदन करने वाले हाशिए पर हैं, क्योंकि उनके पास अर्हता नहीं है। प्रदेश के राजकीय कालेजों में एलटी ग्रेड शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। उनमें से 9342 पदों को भरने को युवाओं से आवेदन मांगे गए हैं। माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश ने बताया कि दो दिन में ही तीन हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं, लेकिन अशासकीय कालेजों के दावेदार युवा इनमें शामिल नहीं हैं। इसकी वजह दोनों जगह की योग्यता अलग होना है।
हंिदूी विषय : अशासकीय कालेज में हंिदूी का स्नातक शिक्षक बनने के लिए इंटर या फिर स्नातक में से किसी एक में भी संस्कृत विषय होना अनिवार्य है। वहीं शासकीय कालेज में हंिदूी का स्नातक शिक्षक बनने के लिए इंटर में संस्कृत होना जरूरी है, वहीं प्रवक्ता पद के लिए स्नातक में संस्कृत अनिवार्य की गई है। संस्कृत से स्नातक करने वाले युवा अब हंिदूी शिक्षक के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
कला एवं संगीत विषय : अशासकीय कालेज में स्नातक कला शिक्षक के लिए आइजीडी बांबे या फिर प्राविधिक कला से इंटर उत्तीर्ण होना चाहिए। वहीं शासकीय कालेज में स्नातक में कला होना अनिवार्य किया गया है। ऐसे ही संगीत विषय में भी दोनों कालेजों की योग्यता में बड़ा अंतर किया गया है। 1पदोन्नति प्रक्रिया : अशासकीय कालेज में स्नातक शिक्षकों की पदोन्नति उसी कालेज में वरिष्ठता के आधार पर होती है, जबकि शासकीय कालेजों में प्रदेश भर के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची के आधार पर प्रमोशन दिये जाते हैं। 1चयन प्रक्रिया : अशासकीय कालेज में स्नातक शिक्षकों का चयन लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के जरिये होता है, जबकि शासकीय कालेजों में चयन का आधार मेरिट है।

मेरिट में गड़बड़ी से शिक्षकों का बदला आवंटन,अब चयनित अभ्यर्थियों के सामने स्कूलों का आवंटन

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रतियोगियों के प्रति गंभीरता की नई मिसाल पेश की है। हंिदूी के प्रवक्ता परिणाम पर अंगुली उठी तो पूरा रिजल्ट ही रिवाइज कर दिया गया है। बुधवार को संशोधित परिणाम वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। 1प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक कालेजों में शिक्षकों की इधर तेजी से नियुक्तियां हो रही हैं। विभिन्न विषयों के प्रवक्ता पद का अंतिम परिणाम घोषित होने के लंबे
समय बाद हंिदूी का रिजल्ट नवंबर में जारी हुआ। इसमें सर्वाधिक अभ्यर्थी होने के कारण उसका परिणाम जारी करने में देरी हुई। रिजल्ट जारी होते ही चयन बोर्ड में कई आपत्तियां आई। इनमें अधिकांश उन युवाओं की थी, जिनकी मेरिट अधिक थी, लेकिन उन्हें आवंटन में दूसरे स्कूल मिल गए थे। साथ ही एक युवा ने आरोप लगाया कि उसके बीएड के अंक जोड़े नहीं गए, अन्यथा उसका भी चयन होता। चयन बोर्ड ने सभी परिणाम दोबारा चेक किए गए। उसमें मेरिट की गड़बड़ी मिली तो पूरे रिजल्ट को ही बदल दिया गया है। सचिव रूबी सिंह ने बताया कि प्रवक्ता हंिदूी के अंतिम परिणाम में बालक वर्ग में 65 सामान्य, 33 पिछड़ी जाति, 20 अनुसूचित जाति एवं एक अनुसूचित जनजाति का अभ्यर्थी चयनित हुआ है। ऐसे ही बालिका संवर्ग में तीन सामान्य, चार पिछड़ी जाति एवं 15 अनुसूचित जाति की महिलाओं का चयन हुआ है। इसमें बदलाव नहीं हुआ है। केवल उनके स्कूलों का आवंटन बदल गया है। वहीं एक चयनित अभ्यर्थी बाहर हुआ है।
अब चयनित अभ्यर्थियों के सामने स्कूलों का आवंटन : चयन बोर्ड की सचिव रूबी सिंह ने बताया कि प्रवक्ता हंिदूी के परिणाम से सबक लिया गया है कि अब चयनित अभ्यर्थियों के सामने ही स्कूल का आवंटन किया जाए, ताकि गलत आवंटन का मुद्दा न उठ सके।

मानदेय बढ़ने तक पढ़ाएंगे नहीं शिक्षामित्र, 32 हजार मानदेय की कर रहे मांग

जब तक सरकार मानदेय बढ़ाने का एलान नहीं करती वह स्कूलों में शिक्षण कार्य नहीं करेंगे। सभी जिलों में शिक्षामित्र कार्य बहिष्कार करके बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। 1प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 32 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इससे उन्हें 3500 रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर कार्य करना पड़ रहा है। दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव कई बार मुख्यमंत्री से मांग कर चुके हैं, लेकिन उनका मानदेय बढ़ा नहीं।
1विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षामित्र अपना हक लेकर रहेंगे। जब तक मानदेय बढ़ाने का आदेश नहीं होता, शिक्षामित्र शिक्षण कार्य नहीं करेंगे। बलिया, बनारस, इलाहाबाद, कानपुर देहात, लखनऊ, सीतापुर, सहारनपुर, बुलंदशहर सहित कई जिलों में अवशेष शिक्षामित्र मानदेय बढ़ाने के लिए अनशन कर रहे हैं। वहीं समायोजित शिक्षामित्र भी उनके समर्थन में हैं।