23.3.17

उत्तर प्रदेश के स्कूलों तक पहुंचा मुख्यमंत्री योगी का संदेश, शिक्षकों को 'टी-शर्ट' नहीं पहनने का अनुरोध, और इन पर लगी रोक

लखनऊ : स्वच्छ भारत मिशन को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही स्कूलों में अनुशासन को लेकर यूपी की योगी सरकार ने कमर कस लिया है. एक तरफ जहां कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा है वहीं स्कूलों को सीएम का सख्त निर्देश पहुंच चुका है.।

जो निर्देश यूपी सीएम को ओर से दिया गया है वह निम्नलिखित है :
1. अगर विद्यालय परिसर में कहीं भी पान मसाला आदि के दाग धब्बे हो तो उन्हें कल हर हाल में मिटवा दें. संकुल प्रभारी भ्रमण कर इसका अनुपालन सुनिश्चित कर लें.।
2.कोई भी शिक्षक किसी भी हाल में विद्यालय अवधि में पान मसाला, गुटका, तम्बाकू, सिगरेट आदि का प्रयोग किसी भी हाल में न करें।
3. ये भी सुनिश्चित करें कि विद्यालय के इर्द गिर्द इसकी दुकानें संचालित न हों, अगर ऐसा है तो बंद करायें।
4. सभी टीचर्स मर्यादित परिधान ही पहनें. टी-शर्ट्स आदि का प्रयोग न करें.।
5. प्रत्येक विद्यालय में प्रार्थना हर हाल में करायी जाये और घंटे का प्रयोग हो।
6. विद्यालय विशेष रूप से जूनियर स्कूल में अगर लड़कियों को स्कूल आने जाने में कहीं छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है या उन्हें कोई परेशान करता है तो तत्काल अवगत करायें।
7. विद्यालय अवधि में मोबाइल का अनावश्यक प्रयोग कदापि न करें।

नई सरकार पिछले 6 माह की सभी भर्तियों की करेगी समीक्षा, मेरिट में गड़बड़ी के कारण शिक्षा विभाग की भर्तियों पर लगाई रोक

इंडिया 24×7 न्यूज़ के अनुसार पिछली सरकार के कामकाज व पिछले 6 महीने की सभी भर्तियों की समीक्षा की जाएगी एवं
मेरिट में गड़बड़ी मिलने की वजह से बेसिक शिक्षा विभाग की सभी नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है यह रोग सरकार के अग्रिम आदेश तक लागू रहेगी

शिक्षक भर्तियों के सम्बन्ध में आज जो लेटर जारी हुआ उसका विश्लेषण: एक लेटर क्या जारी हुआ और समस्त सोशल मीडिया में उमड़ पड़ा तूफान सा

आज बेसिक शिक्षा अधिकारी के लिए एक लेटर जारी हुआ और समस्त सोशल मीडिया में तूफान सा उमड़ पड़ा और इस लेटर को कुछ लोगों द्वारा अपनी विजय के रूप में दिखाने की कोशिशें जारी हैं,जबकि सच्चाई क्या है इसे हम कुछ बिंदुओं से समझेंगें
●लोकसेवा आयोग(UPPSC) की शिकायत की गयी लेकिन ये दिलचस्प रहा की माध्यमिक की भर्ती में किसी तरह की शिकायत नही की लेकिन तब भी माध्यमिक की भर्तियाँ रोक दी गयी,

इससे स्पष्ट है कि प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में रोक प्रशासन ने स्वतः लागू की है न कि कोई TET वालो के कहने पर
●यदि आप लेटर को ध्यान से पढ़ेंगे तो पायेंगे कि इसमें *समस्त गतिमान* भर्तियों को रोकने की बात की गयी है न कि विशेष रूप से 'सिर्फ 12460'
●72825 तदर्थ नियुक्ति,गणित विज्ञान नियुक्ति,12460 भर्ती और साथ में 4000 उर्दू भर्ती, इन सभी प्रक्रियाओं पर रोक लगाई गई है न कि स्पेशल 12460 पर, इसलिए इस लेटर को सिर्फ 12460 या उसके किसी चयन के आधार से जोड़कर देखना आपकी ग्लतफहमी को दर्शाता है।
●ये ध्यान रखिए कि भर्ती प्रक्रियाओं को रोका जाना,नवीन सरकार का एक ऐसा स्टेप है जो आगे जाकर पुनः आगे बढ़ेगा इसलिए घबराएं न, पुनः भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी
●आप सब एक साथ आइए और अपने हक की आवाज उठाइये

RTE2009 एक्ट के बाद शिक्षामित्रों की बगैर टीईटी नियुक्ति असम्भव: अतः समायोजन..... - राहुल पांडेय की कलम से

शिक्षामित्र विवाद : उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के चयन हेतु प्रथम शासनादेश दिनांक 26.05.1999 को जारी हुआ था । यह योजना युवाओं की प्राथमिक शिक्षा में भागीदार हेतु थी ।

विश्व बैंक के सहयोग से सहायक अध्यापकों की सहायता हेतु शिक्षामित्र एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में 11 महीने के संविदा पर रखे गये तथा समय-समय पर नये नियम आते रहे।

इनका चयन ग्राम शिक्षा समिति द्वारा होता था ।
मेरी टीम के संरक्षक विजयराज सिंह का चयन प्रथम चरण में शिक्षामित्र पद पर हो जाता।
मेरिट में वो टॉप पर थे परंतु उनकी उम्र दो वर्ष अधिक थी ।
इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट से बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 में आरक्षित वर्ग के लिए मिली उम्र की छूट के तहत छूट मांगी ।
BSA इलाहाबाद ने काउंटर लगाया कि शिक्षामित्रों का चयन बेसिक शिक्षा नियमावली से नहीं हुआ है , इनका चयन मात्र संविदा कर्मी के रूप में 11 महीने के लिए हुआ है अतः आरक्षण की बात लागू नहीं होगी ।
इस प्रकार विजय राज भाई शिक्षामित्र नहीं बन सके ।
RTE एक्ट लागू होने के बाद शिक्षामित्र योजना बंद कर दी गयी ।
इस प्रकार शिक्षामित्र अध्यापक नहीं थे मगर दिनांक 4 जनवरी 2011 को उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी दिखाकर शिक्षामित्रों को कार्यरत शिक्षक बताकर NCTE से सरकार ने शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण हेतु इजाजत मांगी तथा दिनांक 14 जनवरी 2011 को इजाजत मिल गयी ।
जबकि दिनांक 23 अगस्त 2010 को भारत सरकार के राजपत्र से बीएड वालों को नियुक्ति की छूट मिल गयी थी मगर राज्य सरकार ने बीएड बेरोजगारों की अनदेखी कर दी ।
यदि सरकार ने शिक्षामित्रों की बजाय बीएड पर दांव लगाया होता तो उसके लिए अधिक श्रेयष्कर होता ।
प्रशिक्षण के विरुद्ध बीएड वाले हाई कोर्ट गये और स्थगन मिल गया परंतु खंडपीठ ने यह कहकर स्थगन हटा दिया कि यदि ये कार्यरत शिक्षक नहीं होंगे तो इनका प्रशिक्षण याचिका के अंतिम निर्णय के आधीन रहेगा अर्थात निरस्त होगा ।
प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2014 एवं 2015 में दो चरणों में लगभग 1.37 लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन हुआ।
समायोजन के लिए राज्य सरकार ने राज्य के बाल शिक्षा अधिकार कानून 2011 में प्रथम संशोधन करके शिक्षामित्रों को बगैर टीइटी के ही नियुक्त करने का नियम बनाया और बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 में 19वां संशोधन करके रूल 16 में उप क्लॉज़ जोड़ा और रूल 8 में शिक्षामित्र योग्यता को स्थान दिया ।
बीएड और बीटीसी बेरोजगारों ने समायोजन को चुनौती दी ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ० DY चंद्रचूड ने दोनों संशोधन रद्द कर दिया और शिक्षामित्रों को संविदाकर्मी बताकर उनका समायोजन निरस्त कर दिया ।
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यूपी बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है ।
शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण मामला NCTE पर छोड़ दिया ।
जब सुनवायी चल रही थी तो विजय राज भाई ने कहा कि राहुल भाई इलाहाबाद BSA का काउंटर चीफ साहब को दिखाया जाये तो मैंने कहा कि आप धैर्य रखें दुनिया का सर्वोच्च विद्वान के यहाँ सुनवाई हो रही है, अंत में सत्य खोज लेंगे ।
अंततः चीफ साहब ने संविदाकर्मी बताकर ही समायोजन निरस्त किया ।
ऑनलाइन वर्क में मैं थोड़ा कमजोर हूँ इसलिए श्याम देव मिश्र द्वारा खोजी गयी उमादेवी की नजीर को राजेश राव से मैंने मुकदमे में जिस तरह लिखाया था , चीफ साहब ने उसी शब्दों में आर्डर में उसे लिखाया है ।
शिक्षामित्र/सरकार सुप्रीम कोर्ट गये जहाँ पर उनको दिनांक 7.12.2015 को बीएड के 1100 याचियों को नियुक्ति देने की शर्त पर स्थगन मिला ।
मामला अभी पेंडिंग है ।
मुकदमे की मेरिट के अनुसार दो प्रश्न निर्मित होते हैं ।
1. जब शिक्षामित्र संविदाकर्मी थे तो फिर इनको प्रशिक्षण क्यों दिया गया क्योंकि वह प्रशिक्षण मात्र कार्यरत शिक्षक को ही दिया जा सकता है ?
2. जब इनका प्रशिक्षण अभी तक निरस्त नहीं है तो फिर ये कार्यरत शिक्षक क्यों नहीं थे और इनका समायोजन क्यों निरस्त हो?
शिक्षामित्र संविदाकर्मी थे लेकिन तथ्य छिपाकर उनको प्रशिक्षण दिया गया है अतः इनका प्रशिक्षण अवैध है ।
इनका प्रशिक्षण अवैध नहीं घोषित होता है शिक्षामित्र स्वयं को कार्यरत शिक्षक के आधार पर ही प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक बताएँगे ।
यदि ये कार्यरत शिक्षक थे तो इनको प्रशिक्षण के बाद फिर पुनः नियुक्ति की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
इस प्रकार शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण बचे चाहे न बचे परंतु समायोजन निरस्त होगा क्योंकि RTE एक्ट के बाद इनकी बगैर टीईटी नियुक्ति सम्भव नहीं है अतः समायोजन निरस्त होगा ।
इस प्रकार मुकदमे की मेरिट के तहत शिक्षामित्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से कोई भी राहत की खबर नहीं है ।
इनका प्रयास सिर्फ मुकदमे से भागना कब तक सफल रहेगा यह सर्वोच्च अदालत और इनकी किस्मत पर निर्भर है ।
अगली पोस्ट में बीएड की 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती विवाद, याची राहत एवं नये विज्ञापन पर मुकदमे की मेरिट के अनुसार तर्क रखूँगा ।
कोर्ट क्या करती है यह कोर्ट जानें ।
- राहुल पांडेय