26.3.17

तो भईया अब स्कूल आके पढ़ाना ही पड़ेगा मास्टर साहब को, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर हाजिरी के मामले में नकेल का नया तरीका

देशभर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर हाजिरी के मामले में नकेल कसी जा रही है। तमाम वे शिक्षक जो जब चाहे गोल हो जाते थे और बाद में हाजिरी दर्ज कर देते थे, अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। क्योंकि केंद्र सरकार स्कूलों में रियल टाइम मॉनीटरिंग सिस्टम लाने की योजना बना रही है। इसमें शिक्षकों के स्कूल आने-जाने की टाइमिंग 
की जांच होगी। शिक्षक ने कक्षा के दौरान कितना पढ़ाया है, छात्र को कितना समझ आया और होमवर्क के आधार पर शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड बनेगा। इस बारे में छात्रों व अभिभावकों से फीडबैक भी लिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार को शिकायत मिल रही थी कि नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आई है। सबसे अधिक दिक्कत विभिन्न प्रदेश बोर्ड के सरकारी स्कूलों में थीं। शिक्षक आते भी क्लास में जाकर पढ़ाई नहीं करवा रहे थे। इसके समाधान के लिए रियल टाइम मॉनीटरिंग के तहत स्कूल में शिक्षकों की हाजिरी बॉयोमैट्रिक तरीके से होगी। प्रिंसिपल को कक्षाओं में जाकर क्रास चेक भी करना होगा।

संबंधित शिक्षा बोर्ड की जांच टीम औचक निरीक्षण भी करेंगी। इसके अलावा शिक्षक बनाने की पढ़ाई करवाने वाले कॉलेजों (बीएड कॉलेज) से सरकार एफिडेविट में जानकारी लेगी, वे क्या पढ़ा रहे हैं। वे अपने कोर्स को किस प्रकार से तैयार करवाते हैं। शिक्षक बनने के बाद भी उनकी ट्रेनिंग कराई जाएगी। पढ़ाने के ढंग पर स्टूडेंट फीडबैक में शिक्षकों की कमियों को दूर करने पर भी काम होगा। समय-समय पर पाठ्यक्रम में भी बदलाव होगा, जिसे विशेषज्ञ तैयार करवाएंगे।

सौ टीमें लगेंगी सिस्टम बनाने में
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन द्वारा स्मॉर्ट इंडिया हैकथॉन 2017 का आयोजन एक व दो अप्रैल होगा। इसमें देशभर के इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र देशी तकनीक इजाद करेंगे। इसी में रियल टाइम मॉनेटरिंग सिस्टम की तकनीक बनाई जाएगी। इसके लिए करीब सौ टीमें 36 घंटे लगातार काम करेंगी।

लिखित परीक्षा के आधार पर हो समायोजन, शिक्षा विभाग की भर्तियों का मामला

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National Pension System: नए नियम तैयार , लेकिन अंशदान का इंतजार

इलाहाबाद : कर्मचारियों की नई पेंशन को राष्ट्रीय पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है। इसके लिए तमाम नए-नए नियम भी बनाए गए हैं। जिन्हें इसका लाभ दिया जाना है, उनके वेतन से पेंशन के लिए कटौती भी शुरू हो गई है, लेकिन सरकार का अंशदान कब से मिलेगा यह स्पष्ट नहीं है। यही नहीं जिलों में इसका सिस्टम तक नहीं बन पाया है। कर्मचारियों को इसका लाभ फिलहाल नहीं मिल रहा है।

प्रदेश में एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त हुए सभी अधिकारी कर्मचारियों को नई पेंशन योजना से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए पिछले कई महीने से लगातार निर्देश जारी हो रहे हैं और एक के बाद एक नियम बन रहा है। कुछ दिन पहले यह घोषणा भी हुई कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली की पासबुक भी बनाई जाएगी। नियम बन गए हैं लेकिन अनुपालन करने वाले इस ओर से उदासीन हैं। अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना है। इसके लिए हर जिला मुख्यालय पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर, कंप्यूटर सिस्टम और सॉफ्टवेयर आदि का इंतजाम होना था, लेकिन अब किसी भी जिले में यह व्यवस्था नहीं हो सकी है। यह जरूर है कि बीते मई माह से शिक्षक व अन्य के वेतन से पेंशन का अंशदान की कटौती शुरू हो गई है, जो ट्रेजरी में जमा की जा रही है। पेंशन लाभ के लिए सरकारी अंशदान मिलना है, लेकिन अब तक यह नहीं दिया जा रहा है। इससे शिक्षक व अन्य को ब्याज का नुकसान होने के साथ ही पेंशन का वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। निर्देश है कि कर्मचारी अंशदान व सरकारी अंशदान दोनों की धनराशि ोशनल सिक्योरिटी डेवोपॉजिटरी लिमिटेड मुंबई को भेजी जानी है।

शिक्षा महकमे को अब मिलेंगे अफसर, सूबे की सत्ता पर नई टीम काबिज हुयी

इलाहाबाद : सूबे की सत्ता पर नई टीम काबिज हो चुकी है। अब अलग-अलग महकमों को अफसर मिलने की बारी है। इसमें शिक्षा विभाग का नाम सबसे ऊपर है। शिक्षा निदेशक बेसिक का पद एक माह से खाली है। इस पद के लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है, सिर्फ डीपीसी का इंतजार है। इसी तरह विभाग में अपर शिक्षा निदेशक के तीन पद भी लंबे समय से खाली चल रहे हैं। उसके लिए भी निदेशालय से रिपोर्ट मांगी गई है।

बीएसए व अन्य अफसरों को यहां से वहां भेजने की सूची जारी हुई। चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले तक यह फेरबदल चलता रहा। शासन बीते दिसंबर माह में ही नए शिक्षा निदेशक के चयन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। इस पद पर उप्र शैक्षिक सामान्य शिक्षा संवर्ग सेवा समूह ‘क’ के अधिकारियों की पदोन्नति होनी है। शासन ने अपर शिक्षा निदेशक स्तर के आठ अफसरों संजय सिन्हा, विनय कुमार पांडेय, साहब सिंह निरंजन, रमेश, उत्तम गुलाटी, शैल कुमारी यादव, ममता रानी एवं नीना श्रीवास्तव के संबंध में गोपनीय रिपोर्ट व अन्य सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वरिष्ठता में परिषद सचिव सिन्हा सबसे ऊपर है। वहीं, जारी सूची में उत्तम गुलाटी 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो चुकी हैं उनकी दावेदारी खुद ही खत्म हो गई। सूची के दो अन्य अफसर रमेश व शैल कुमारी यादव 2017 में ही सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में नए शिक्षा निदेशक के रूप में सिन्हा का प्रमोशन होना लगभग तय है। असल में कुछ माह पहले एक शिक्षा निदेशक के प्रतिनियुक्ति पर नई दिल्ली जाने की चर्चा तेज थी, उस समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि सिन्हा को उस पद पर भेजा जा सकता है। शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा बीते 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो चुके हैं।