21.4.17

मदरसों में शिक्षण अवधि में मोबाइल हुआ प्रतिबंधित: अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ बोर्ड की बैठक में लिया गया अहम फैसला

उत्तर प्रदेश अरबी-फारसी मदरसा बोर्ड ने सूबे के सभी मदरसों के लिए नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षण अवधि में कक्षा में मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत मदरसा परिसर में
स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पानी की सफाई पर जोर दिया जाएगा। शिक्षा के स्तर एवं गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। छात्र-छात्रओं के नाखून साफ होने चाहिए।1सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्णय में परिसर में धूम्रपान पर पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्राचार्य, प्रबंधक, शिक्षक, कर्मचारी और छात्र ध्रूमपान का प्रयोग करता पाया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा शिक्षणकार्य अवधि में शिक्षक और कर्मचारी को किसी अन्य कार्य के लिए न भेजा जाए। मिड डे मील के क्रियान्वयन की व्यवस्था सुव्यवस्थित ढंग से लागू किया जाए। मेड डे मील का मेन्यू पेंट द्वारा मदरसा के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए। 2012 के बाद नियुक्त लिपिक को कंप्यूटर का ज्ञान आवश्यक है। मदरसे में नियुक्त प्रत्येक शिक्षक, कर्मचारी और प्रधानाचार्य को उनके पद के अनुसार अर्हता होनी चाहिए। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी एसपी तिवारी ने बताया कि उक्त निर्देश गत दिनों अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री के साथ हुई बैठक में लिया गया।’>>अनियमितता पाए जाने वाले मदरसों पर होगी कार्रवाई1’>>परिसर में स्वच्छता पर दिया जाएगा विशेष ध्यान

मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 25 अप्रैल से शुरू होंगी
सत्र 2016-17 के लिए उत्तर प्रदेश अरबी फारसी मदरसा बोर्ड की विभिन्न परीक्षाओं की घोषणा कर दी है। परीक्षाएं राज्य स्तर पर 25 अप्रैल शुरू होगी। परीक्षाओं का क्रम 8 मई तक जारी रहेगा। इलाहाबाद में परीक्षा के लिए 17 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें तीन इंटर कालेज और बाकी मदरसे हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एससी तिवारी ने बताया कि परीक्षा के लिए व्यापक तैयारियां कर ली गई हैं।

काफी गहरी हैं बीएसए आफिस में भ्रष्टाचार की जड़ें: अब तक लेखा विभाग का काम संभाले था एक सेवानिवृत्त शिक्षक

लखीमपुर (लखीमपुर) : जिले में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों की पेंशन और जीपीएफ के भुगतान के मामले लटके हुए हैं। भ्रष्टाचार के चलते सेवानिवृत्त शिक्षकों को जीपीएफ का पैसा भी नहीं मिल पा रहा है। मामले का खुलासा डीएम के औचक निरीक्षण में हुआ। चार साल पहले रिटायर हुए एक शिक्षक के ही हाथों में पेंशन और जीपीएफ के मामलों का निस्तारण करते पाया गया।

जब खुद जिलाधिकारी को ही सेवानिवृत्त शिक्षक ने काम कराने के लिए दूर खड़े रहने का आदेश दे डाला। इस सीट पर सैकड़ों ऐसे मामले लटके पड़े हैं, जिसमें कई साल पहले सेवा से मुक्त हो चुके शिक्षकों के लाखों के देयक बाबुओं के कारस्तानी के चलते लटके पड़े हैं। मार्च माह में सेवानिवृत्त 158 बेसिक शिक्षकों को पेंशन और जीपीएफ का भुगतान तो दूर अभी तक उनकी फाइलें ही लखनऊ निदेशालय को नहीं भेजी जा सकीं। सेवानिवृत्त शिक्षक पेंशन और जीपीएफ के भुगतान के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। बड़ी संख्या में सहायक अध्यापक बने शिक्षकों के एरियर तक नहीं बन पाए हैं। एरियर पाने के लिए नवनियुक्त शिक्षक बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। 1बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा विभाग ने एक करामाती शिक्षक को सेवानिवृत्त के बाद लेखा संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी सौंप दी। पिछले चार वर्षों से पेंशन और वेतन संबंधी मामलों के भुगतान का काम इन्हीं शिक्षक के हाथों होता था। यहां तक कि यह सेवानिवृत्त शिक्षक लेखाधिकारी के लीगल एडवाइजर भी बताए जाते हैं। तमाम शिक्षकों की पासबुकें तक अपडेट नहीं हैं। जबकि इसकी जिम्मेदारी लेखा विभाग की है। वर्ष 2016 में रिटायर हुए शिक्षकों का बढ़े हुए वेतन का एरियर अभी तक नहीं मिला है। इसके लिए वे लगातार चक्कर काट रहे हैं। जिलाधिकारी के मामला संज्ञान में आने के बाद इस भ्रष्ट महकमे में हलचल तो जरूर मची है, लेकिन इसका भविष्य में शिक्षकों को कितना फायदा मिल पाता है यह तो आने वाला समय बताएगा। इस विभाग में बिना सुविधाशुल्क दिए लेखा विभाग में काम करा पाना अब तक किसी मुसीबत से कम नहीं रहा है। लेखाधिकारी र¨वद्र शर्मा ने बताया कि वह न्यायालय में हैं इसलिए बात संभव नहीं है। देरशाम उनसे दोबारा बात नहीं हो पाई। उधर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय शुक्ला ने बताया कि उनके यहां कोई भी प्रकरण पेंशन आदि के नहीं लटके हैं। लेखा विभाग के स्तर पर ही मामले लंबित हैं।

सोती शिक्षिका के फोटो पर घिरे बीएसए: शिक्षक संगठनों के विरोध में आने पर बीएसए बैकफुट पर: बोले, निलंबन नहीं, स्टेनो ने भी शिक्षिका से मांगी माफी

लखीमपुर: कक्षा में सोती शिक्षिका का फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूट रहे बीएसए फोटो को लेकर खुद घिर गए । शिक्षिका का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर शिक्षक संगठनों ने बीएसए को कठघरे में खड़ा कर
दिया। साथ ही अन्य लोगों ने भी निंदा की। अब बीएसए शिक्षिका को निलंबित किए जाने की बात को भी खारिज कर रहे हैं। इतना ही नहीं महिला का फोटो वायरल करने वाला स्टेनो अब लिखित में माफी मांगता फिर रहा है। 1 बीएसए से मिले संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने इसे निजता के हनन का मामला बताया है। कई अन्य संगठनों ने भी इस मामले पर अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहनाहै कि इस तरह फोटो खिंचाना और व्हाट्स ग्रुप पर वायरल करना शिक्षिका का अपमान है।इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये था मामला
बुधवार को बीएसए संजय शुक्ला ने उन्नीस स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। यहां बीएसए को अजब-गजब मामले दिखाई दिए। ऐसे ही सिकंदराबाद के एक स्कूल में महिला टीचर अपनी बच्ची को गोद में लेकर सोती हुई मिली। साहब के स्टेनो ने उसका फोटो खींच लिया। अगले ही पल वह शिक्षा विभाग के एक व्हाटसएप ग्रुप से बाईपास होते हुए जिले के कई ग्रुपों में वायरल हो गई। उनके आफिस से बाकायदा इस बात की पुष्टि की जाने लगी कि ये घटना हुई है और उस टीचर को निलंबित किया गया है।
रातोंरात बदले हालात
बुधवार दोपहर बाद से वायरल होने लगी उस फोटो को लेकर गुरुवार सुबह तक हालात बदल चुके थे। न जाने कितने खबरिया चैनल बीएसए की बाइट लेने उनके दफ्तर के बाहर जमा हो गए। शिक्षक नेता लासमबंद होकर दफ्तर पहुंच गए मामला उल्टा पड़ता देख बीएसए साहब ने ये तक कह दिया कि उस टीचर को निलंबित ही नहीं किया गया। इतना ही बीएसए के स्टेनो ने बाकायदा लिखित में ग्रुप पर अपना माफीनाम भी डाला और टीचर से माफी मांग ली। इधर भाजपा नेता व जिला पंचायत सदस्य अनूप शुक्ला ने इसे नारी के अपमान का मुददा बताया और बीएसए के इस्तीफे की मांग कर डाली। हंिदूू जागरण मंच ने भी इस घटना की निंदा करते हुए बीएसए पर कार्रवाई की मांग की है। मंच के अध्यक्ष राहुल तिवारी व मंत्री संजीव सनातन ने ऐसी घटनाओं को रोकने की भी मांग की है।’>>शिक्षक संगठनों के विरोध में आने पर बीएसए बैकफुट पर 1’>>बोले, निलंबन नहीं, स्टेनो ने भी शिक्षिका से मांगी माफी

CM Yogi eeached the Primary School