25.11.16
BTC 2016: काउंसिलिंग में बदलेंगे नियम, निजी कॉलेजों को सीटें भरने का मौका देने पर बनी सहमति
इलाहाबाद : बेसिक टीचर्स सर्टिफिकेट यानी बीटीसी 2016 में प्रवेश के नियम बदलने की लगभग सहमति बन गई है। शासन की मंजूरी के बाद ही इसका औपचारिक एलान होगा। फिलहाल परीक्षा नियामक प्राधिकारी
कार्यालय बीटीसी का दाखिला शुरू कराने का खाका खींचने में जुटा है। साथ ही नियमों में बदलाव का प्रस्ताव अगले सप्ताह शासन को भेज जाने की तैयारी है, ताकि दाखिले की प्रक्रिया नये साल में शुरू कराई जा सके।
प्रदेश में बीटीसी निजी कॉलेजों की भरमार होने के बाद से वहां दाखिले को लेकर हर बार विवाद हो रहा है। इस बार तो आगरा समेत कई जिले में जिलाधिकारी को हस्तक्षेप करके कलक्ट्रेट कर्मचारियों को लगाकर कॉलेजों का आवंटन किया गया। इसके अलावा निजी कॉलेज यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के प्राचार्य उनकी सीटें भरने में रुचि नहीं दिखाते इसीलिए सीटें खाली रह जाती हैं।
2015 की बीटीसी काउंसिलिंग में तो परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने डायट प्राचार्यो को निर्देश दिया था कि वह अंतिम तीन दिन निजी कॉलेजों को अपनी शेष सीटें भरने का मौका दें। हालांकि इसका कहीं अनुपालन नहीं हुआ। सूबे में निजी कॉलेजों की संख्या और बढ़ने जा रही है, इससे समस्या गंभीर हो सकती है। इससे बचने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बीटीसी 2016 के नये दाखिले में नियमों में बदलाव के लिए पिछले दिनों बैठक की थी। कि निजी कॉलेजों को अपनी सीटें भरने का मौका दिया जाए। पहले ऑनलाइन काउंसिलिंग पर मंथन हुआ इसमें वेबसाइट एवं अन्य दिक्कतों के कारण विभाग पीछे हट गया।
कार्यालय बीटीसी का दाखिला शुरू कराने का खाका खींचने में जुटा है। साथ ही नियमों में बदलाव का प्रस्ताव अगले सप्ताह शासन को भेज जाने की तैयारी है, ताकि दाखिले की प्रक्रिया नये साल में शुरू कराई जा सके।
प्रदेश में बीटीसी निजी कॉलेजों की भरमार होने के बाद से वहां दाखिले को लेकर हर बार विवाद हो रहा है। इस बार तो आगरा समेत कई जिले में जिलाधिकारी को हस्तक्षेप करके कलक्ट्रेट कर्मचारियों को लगाकर कॉलेजों का आवंटन किया गया। इसके अलावा निजी कॉलेज यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के प्राचार्य उनकी सीटें भरने में रुचि नहीं दिखाते इसीलिए सीटें खाली रह जाती हैं।
2015 की बीटीसी काउंसिलिंग में तो परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने डायट प्राचार्यो को निर्देश दिया था कि वह अंतिम तीन दिन निजी कॉलेजों को अपनी शेष सीटें भरने का मौका दें। हालांकि इसका कहीं अनुपालन नहीं हुआ। सूबे में निजी कॉलेजों की संख्या और बढ़ने जा रही है, इससे समस्या गंभीर हो सकती है। इससे बचने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बीटीसी 2016 के नये दाखिले में नियमों में बदलाव के लिए पिछले दिनों बैठक की थी। कि निजी कॉलेजों को अपनी सीटें भरने का मौका दिया जाए। पहले ऑनलाइन काउंसिलिंग पर मंथन हुआ इसमें वेबसाइट एवं अन्य दिक्कतों के कारण विभाग पीछे हट गया।
UPTET अकेडमिक मेरिट नेता कपिल यादव क्या कहते हैं कल के कोर्ट के निर्णय पर
शुभ संध्या दोस्तो जूनियर भर्ती में जो लोग जॉब पा चुके है वो लोग अपनी पुरी ऊर्जा सुप्रीम कोर्ट में लगा दे मुकाबला अब बराबरी पे आ चुका है इस बार चुके तो सारी जिंदगी पछताने के शिवा कुछ नही मिलेगा 72825 में
जिन लोगो का चयन टेट मेरिट से नही हो पाया है वे भी इस सत्य को स्वीकार कर ले जॉब पाना है तो नये विज्ञापन समर्थक बनिये और अकेडमिक टीम से जुडिये याची राहत एक पड़ाव था नया विज्ञापन हम लोगो की मंजिल है
और सफल इंसान वही है जो अपनी मंजिल को प्राप्त करे दोस्तो अगर श्रीमान अशोक भुसण जी का 20 नवम्बर 2013 को 15 संशोधन रद्द करने का फैसला सही होता तो श्रीमान माननीय चीफ जस्टिस महोदय जूनियर वाले केस पे बहस के दौरान ये नही कहते की जूनियर भर्ती वालो का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अन्तर्गत होगा दोस्तो आज़ जूनियर वाले स्कूल जा रहे है वेतन पा रहे है अपनी प्रभावी पैरवी कर रहे है तो इसके लिये वे लोग बँधाई के पात्र है जितने भी नये विज्ञापन समर्थक है जिनका अकेडमिक मेरिट अच्छा है उन सभी से निवेदन है कि याची राहत कि कल्पना से जितनी जल्दी बाहर निकल जायेंगे उतनी जल्दी अपने अपने स्कूल पहुँच जायेगे जिनका ना टेट से हुआ और ना ही अकेडमिक से होगा वे याची राहत समायोजन का झुनझुना तब तक बजाते रहेंगे जब तक आप लूटते रहेंगे दोस्तो सही दिशा में कोशिश करोगे सफलता ज़रूर मिलेगा गलत दिशा में कोशिश करोगे शिवाय डेट के कुछ नही मिलेगा
जिन लोगो का चयन टेट मेरिट से नही हो पाया है वे भी इस सत्य को स्वीकार कर ले जॉब पाना है तो नये विज्ञापन समर्थक बनिये और अकेडमिक टीम से जुडिये याची राहत एक पड़ाव था नया विज्ञापन हम लोगो की मंजिल है
और सफल इंसान वही है जो अपनी मंजिल को प्राप्त करे दोस्तो अगर श्रीमान अशोक भुसण जी का 20 नवम्बर 2013 को 15 संशोधन रद्द करने का फैसला सही होता तो श्रीमान माननीय चीफ जस्टिस महोदय जूनियर वाले केस पे बहस के दौरान ये नही कहते की जूनियर भर्ती वालो का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अन्तर्गत होगा दोस्तो आज़ जूनियर वाले स्कूल जा रहे है वेतन पा रहे है अपनी प्रभावी पैरवी कर रहे है तो इसके लिये वे लोग बँधाई के पात्र है जितने भी नये विज्ञापन समर्थक है जिनका अकेडमिक मेरिट अच्छा है उन सभी से निवेदन है कि याची राहत कि कल्पना से जितनी जल्दी बाहर निकल जायेंगे उतनी जल्दी अपने अपने स्कूल पहुँच जायेगे जिनका ना टेट से हुआ और ना ही अकेडमिक से होगा वे याची राहत समायोजन का झुनझुना तब तक बजाते रहेंगे जब तक आप लूटते रहेंगे दोस्तो सही दिशा में कोशिश करोगे सफलता ज़रूर मिलेगा गलत दिशा में कोशिश करोगे शिवाय डेट के कुछ नही मिलेगा
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