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यूपी, उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में 4 फरवरी से 8 मार्च तक होंगे चुनाव

चुनाव आयोग ने यूपी, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन राज्यों में 4 फरवरी से 8 मार्च तक चुनाव होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ नसीम जैदी ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। सभी राज्यों के चुनाव एक साथ होंगे।

मतदान कब, कहां

गोवा में 4 फरवरी को 
पंजाब में 4 फरवरी को 
उत्तराखंड में 15 फरवरी को 
मणिपुर में 4 मार्च और 8 मार्च को 
उत्तर प्रदेश में मतदान सात चरण में होंगे। पहला चरण- 11 फरवरी, दूसरा चरण- 15 फरवरी, तीसरा चरण- 19 फरवरी, चौथा चरण- 23 फरवरी, पांचवां चरण- 27 फरवरी, छठा चरण- 4 मार्च, सातवां चरण- 8 मार्च। 

जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर हैं। इन पांच राज्यों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं।

जैदी ने बताया कि मतदाताओं को रंगीन वोटर गाइड मिलेंगे। 1 लाख 85 हजार मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। 16 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे। पांच राज्यों में 690 सीटों पर मतदान होंगे।

उन्होंने बताया कि सभी राज्यों में ईवीएम से मतदान होगा। मतदाता नोटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। कुछ जगहों पर महिलाओं के लिए अलग से मतदान केंद्र होंगे। कई राज्यों में ईवीएम पर नाम के साथ उम्मीदवारों की फोटो भी दिखेगी।

आज से ही पांच राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। उम्मीदवारों को 20 हजार से ज्यादा का खर्च चेक से करना होगा। टीवी से प्रचार होने पर वह खर्च में जोड़ा जाएगा। 

केंद्र सरकार ने इन पांच राज्यों में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षाबलों के 85000 जवानों को उपलब्ध कराने की बात कही है।

किस राज्य में किसकी सरकार

यूपी में सपा, उत्तराखंड में कांग्रेस, पंजाब में अकाली और भाजपा गठबंधन, गोवा में भाजपा और मणिपुर में कांग्रेस की सरकार है। अखिलेश यादव यूपी, हरीश रावत उत्तराखंड, प्रकाश सिंह बादल पंजाब, ओकराम इबोबी सिंह मणिपुर और लक्ष्मीकांत पारसेकर गोवा के मुख्यमंत्री हैं।

पांचों राज्यों में हालिया स्थिति

उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश में फिलहाल समाजवादी पार्टी की मेजोरिटी सरकार है और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री हैं। यूपी में पार्टियों के पास हैं इतने सिटिंग एमएलए-
कुल सीट: 403
समाजवादी पार्टी- 203
बहुजन समाज पार्टी- 80
भारतीय जनता पार्टी- 40, 
कांग्रेस- 28
राष्ट्रीय लोकदल के पास- 8
पीस पार्टी- 4
अन्य- 11

मणिपुर:
मणिपुर में फिलहाल कांग्रेस की मेजोरिटी सरकार है। इस राज्य में 60 में से 50 सीटें जीतकर कांग्रेस ने 2012 में अपना दबदबा कायम रखा था। यहां फिलहाल ओकराम इबोबी सीएम हैं।
कुल सीटें: 60
कांग्रेस- 50
बीजेपी- 1
एनपीएफ- 4 
खाली- 5

गोवा:
गोवा में बीजेपी की मेजोरिटी वाली सरकार है। यहां लक्ष्मीकांत पार्सेकर सीएम हैं।
कुल सीट: 40
बीजेपी- 27
कांग्रेस- 7 
अन्य- 10
खाली-2

पंजाब: पंजाब में बीजेपी समर्थित अकाली सरकार है। यहां फिलहाल अकाली चीफ प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री हैं।
कुल सीट: 117
शिरोमणि अकाली दल- 54 
बीजेपी- 11
कांग्रेस- 49 सीटें हैं लेकिन फिलहाल सभी विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है। 
अन्य- 3

उत्तराखंड:
कांग्रेस में एक 10 कांग्रेस के और एक बीजेपी के विधायक को अयोग्य ठहरा दिए जाने के बाद कांग्रेस की बसपा, उक्रांद और स्वतंत्र विधायकों के समर्थन वाली सरकार है। यहां कांग्रेस के हरीश रावत सीएम हैं। 
कुल सीट: 71
प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट-
कांग्रेस: 26
बसपा: 2
यूकेडी: 1 
स्वतंत्र: 3
नोमिनेटेड: 1

विपक्ष- 
बीजेपी: 27
स्पीकर:1 
(बीजेपी का 1 और कांग्रेस के 10 विधायक अयोग्य होने से मेजोरिटी के लिए सिर्फ 31 विधायकों की ज़रुरत है)

मुलायम सिंह से मिलने दिल्ली पहुंचे शिवपाल

Election Commission likely to announce assembly poll dates today

यूपी में आचार संहिता लागू, जानिए क्या है आदर्श चुनाव आचार संहिता ?

*यूपी में आचार संहिता लागू, जानिए क्या है आदर्श चुनाव आचार संहिता ?*

लखनऊ. यूपी में चुनावी काउंट डाउन शुरू हो गया है। चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर राज्यों में एक साथ चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश में विधानसभा में सात चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। चुनाव का पहला चरण 11 फरवरी को होगा, वहीं अंतिम और सातवां चरण 8 मार्च को होगा। सभी राज्यों में मतगणना 11 मार्च को होगी। इसके साथ ही पांचों राज्यों में राज्यों में आज से ही आचार संहिता लागू हो गई है।
*आदर्श चुनाव आचार संहिता*आदर्श चुनाव आचार संहिता यानी वे नियम जिनका पालन उम्मीदवारों और उनकी पार्टियों के लिए चुनाव के दौरान करना जरूरी है। इन नियमों को राजनीतिक दलों के साथ समन्वय और उनकी सहमति के साथ ही बनाया गया है, ताकि चुनाव के दौरान पारदर्शिता होने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर प्रदान किए जा सकें। चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही संबंधित राज्य में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती है और सभी सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद प्रत्याशियों और राजनीतिक पार्टियों के चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश का ही पालन करना होगा। ये नियम राजनीतिक पार्टी के समन्वय और सहमति के साथ ही बनाए गए हैं। कम शब्दों में समझें तो चुनाव आदर्श आचार संहिता का मतलब है कि देश की कोई भी सरकार (केंद्र या राज्य), मंत्री या अधिकारी नई योजना की शुरुआत या घोषणा नहीं कर सकते। इसके अलावा प्रत्याशी और राजनीतिक दलों को रैली करने, जुलूस निकालने, मीटिंग करने के लिए इजाजत लेनी होगी और इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी। आचार संहिता की मुख्य बातें :
*इन पर भी रखना होगा ध्यान-* कोई भी राजनीतिक पार्टी या प्रत्याशी ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य की भावना को बढ़ावा मिले।- राजनीतिक पार्टी या प्रत्याशियों पर निजी हमले नहीं किए जा जाने चाहिए, हालांकि उनकी नीतिगत आलोचना की जा सकती है।- मतदाताओं को किसी भी प्रकार के प्रलोभन या किसी धमकी के जरिए वोट देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।- मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार संबंधी किसी भी तरह की सार्वजनिक रैली और बैठक प्रतिबंधित है।- मतदान के दिन मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकता।- प्रत्याशी या राजनीतिक दल मतदान केंद्रों पर वोटरों को लाने ले जाने के लिए वाहन मुहैया नहीं करा सकते।- चुनाव प्रचार के दौरान आम लोगों की निजता या व्यक्तित्व का सम्मान होना चाहिए।- प्रत्याशी या राजनीतिक दल किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति का इस्तेमाल उसकी इजाजत के बिना नहीं कर सकते।- राजनीतिक पार्टियों को सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनके कार्यकर्ता दूसरी राजनीतिक पार्टियों की रैली आथवा सभाओं में किसी भी तरह से बाधा नहीं डालेंगे।- राजनीतिक पार्टी या प्रत्याशी को रैली, जुलूस अथवा मीटिंग करने से पहले स्थानीय पुलिस को जानकारी देकर प्रस्तावित कार्यक्रम का समय और स्थान बताना होगा।- किसी इलाके में निषेधाज्ञा लागू होने पर इससे छूट पाने के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी।- किसी भी स्थिति में पुतला जलाने की इजाजत नहीं होगी
सत्ताधारी पार्टी के लिए दिशा-निर्देश- चुनाव की घोषणा होने के बाद संबंधित सरकार आदर्श चुनाव आचार संहिता के दायरे में आ जाएगी।- इस दौरान प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री कोई भी नई घोषणा नहीं कर सकते।- सरकारी दौरों को चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।- चुनाव प्रचार के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं हो सकता।- सरकारी मशीनरी, सरकारी वाहन, सरकारी आवास तथा अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल चुनाव संबंधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित है।- चुनाव आचार संहिता के दौरान सरकार कैबिनेट की बैठक नहीं कर सकती।- अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले और तैनाती संबंधी मामलों में चुनाव आयोग की अनुमति ली जानी अनिवार्य है।
आयोग की शर्तेंटीवी चैनल पर प्रचार हुआ तो प्रत्याशी के खाते में खर्च दर्ज होगा।20 हजार से ज्यादा भुगतान चेक से होगा28 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं प्रत्याशी
NOTE:- यहां पर पूरे नियम व शर्तें नहीं हैं। इनके अलावा कुछ और नियम चुनाव आयोग ने बनाए होंगे, उन्हें भी फॉलो करना होगा।