24.3.17

कक्षा-1 से 3 तक की किताबों का सिलेबस बदला, उत्तर प्रदेश पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2013 के तहत रिवाइज्ड किया गया सिलेबस, मंजूरी के लिए बेसिक शिक्षा परिषद को भेजा प्रस्ताव

कक्षा एक से तीन तक किताबों का सिलेबस बदला, उत्तर प्रदेश पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2013 के तहत रिवाइज्ड किया गया सिलेबस, मंजूरी के लिए बेसिक शिक्षा परिषद को भेजा प्रस्ताव

 कक्षा एक से तीन तक किताबों का सिलेबस बदला, उत्तर प्रदेश पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2013 के तहत रिवाइज्ड किया गया सिलेबस, मंजूरी के लिए बेसिक शिक्षा परिषद को भेजा प्रस्ताव

⚫ उत्तर प्रदेश पाठ्यचर्चा की रूपरेखा-2013 के तहत रिवाइज्ड किया गया सिलेबस
⚫ कक्षा एक से तीन तक किताबों का सिलेबस बदला
⚫ मंजूरी के लिए बेसिक शिक्षा परिषद को भेजा प्रस्ताव

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के बच्चे बदले हुए पाठ्यक्रम से पढ़ाई करेंगे। इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान इलहाबाद और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने वर्तमान सिलेबस को उत्तर प्रदेश पाठ्यचर्चा की रूपरेखा-2013 के तहत रिवाइज्ड किया है। इसमें कई अध्याय में बच्चों को आसानी से समझाने के लिए चित्र व संकेतक अंकित किए गए हैं। इसके अलावा अध्याय के नाम भी बदलने की बात सामने आई है। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग ने रिवाइज्ड सिलेबस का प्रस्ताव बेसिक शिक्षा परिषद को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

मौजूदा समय में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में करीब एक करोड़ 80 लाख बच्चे पढ़ते हैं। कक्षा एक से तीन तक हिन्दी माध्यम में कार्य पुस्तिका मिलाकर कुल 14 किताबें पढ़ाई जाती हैं। वहीं अंग्रेजी माध्यम में इसकी संख्या सात है। अभी तक नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ)-2005 और आरटीई 2009 के तहत तैयार किए गए सिलेबस के अनुसार ही कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में पढ़ाई हो रही है। लेकिन अब इस सिलेबस को आवश्यकता के अनुसार रिवाईज्ड किया गया है।

⚫ एक्सपर्ट बोले-जरूरत के मुताबिक किया बदलाव
राज्य शिक्षा संस्थान इलाहाबाद के प्राचार्य दिव्यकांत शुक्ला कहते हैं, ‘अभी तक बच्चे एनसीई-2005 व आरटीई 2009 के अंतर्गत तैयार सिलेबस को पढ़ रहे हैं, लेकिन अब उसमें बदलाव जरूरी था, इसलिए आवश्यकता अनुसार उसके अध्यायों को रिवाइज्ड कर उसे और सरल बनाया गया है, इनमें बेसिक शिक्षा के एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया था। हालांकि अभी इस रिजवाइज्ड सिलेबस को परिषद से अनुमति मिलनी बाकी है।’

कक्षा एक से तीन तक किताबों में कुछ बदलाव किया गया है, कुछ अध्यायों के नाम बदलने के साथ ही उसे रोचक बनाया गया है। इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। उम्मीद है जल्द मंजूरी मिल जाएगी।
- अमरेंद्र सिंह, पाठ्य पुस्तक अधिकारी उप्र
कलरव-कक्षा 1, कलरव-कक्षा 2, गिनराता-कक्षा 3, कलरव-कक्षा 3, हमारा परिवेश-कक्षा 3, रेनबो-कक्षा 3, संस्कृत पीयूषम-कक्षा 3 ।

सीतापुर प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिकाओं ने तीन युवकों पर उनकी फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर वायरल करने का लगाया आरोप* @sitapur_police

सीतापुर प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिकाओं ने तीन युवकों पर उनकी फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर वायरल करने का
लगाया आरोप

12460 शिक्षक भर्ती शुरू करवाने हेतु अभ्यर्थी इस प्रपत्र पर करें अपील

12460 शिक्षक भर्ती शुरू करवाने हेतु अभ्यर्थी इस प्रपत्र पर करें अपील

शिक्षामित्र विवाद: जानिए शिक्षामित्रों की जन्म कुंडली

शिक्षामित्र विवाद : उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के चयन हेतु प्रथम शासनादेश दिनांक 26.05.1999 को जारी हुआ था । यह योजना युवाओं की प्राथमिक शिक्षा में भागीदार हेतु थी ।
विश्व बैंक के सहयोग से सहायक अध्यापकों की सहायता हेतु शिक्षामित्र एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में 11 महीने के संविदा पर रखे गये तथा समय-समय पर नये नियम आते रहे।
इनका चयन ग्राम शिक्षा समिति द्वारा होता था ।
मेरी टीम के संरक्षक विजयराज सिंह का चयन प्रथम चरण में शिक्षामित्र पद पर हो जाता।
मेरिट में वो टॉप पर थे परंतु उनकी उम्र दो वर्ष अधिक थी ।
इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट से बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 में आरक्षित वर्ग के लिए मिली उम्र की छूट के तहत छूट मांगी ।

BSA इलाहाबाद ने काउंटर लगाया कि शिक्षामित्रों का चयन बेसिक शिक्षा नियमावली से नहीं हुआ है , इनका चयन मात्र संविदा कर्मी के रूप में 11 महीने के लिए हुआ है अतः आरक्षण की बात लागू नहीं होगी ।
इस प्रकार विजय राज भाई शिक्षामित्र नहीं बन सके ।
RTE एक्ट लागू होने के बाद शिक्षामित्र योजना बंद कर दी गयी ।
इस प्रकार शिक्षामित्र अध्यापक नहीं थे मगर दिनांक 4 जनवरी 2011 को उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी दिखाकर शिक्षामित्रों को कार्यरत शिक्षक बताकर NCTE से सरकार ने शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण हेतु इजाजत मांगी तथा दिनांक 14 जनवरी 2011 को इजाजत मिल गयी ।
जबकि दिनांक 23 अगस्त 2010 को भारत सरकार के राजपत्र से बीएड वालों को नियुक्ति की छूट मिल गयी थी मगर राज्य सरकार ने बीएड बेरोजगारों की अनदेखी कर दी ।
यदि सरकार ने शिक्षामित्रों की बजाय बीएड पर दांव लगाया होता तो उसके लिए अधिक श्रेयष्कर होता ।
प्रशिक्षण के विरुद्ध बीएड वाले हाई कोर्ट गये और स्थगन मिल गया परंतु खंडपीठ ने यह कहकर स्थगन हटा दिया कि यदि ये कार्यरत शिक्षक नहीं होंगे तो इनका प्रशिक्षण याचिका के अंतिम निर्णय के आधीन रहेगा अर्थात निरस्त होगा ।
प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2014 एवं 2015 में दो चरणों में लगभग 1.37 लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन हुआ।
समायोजन के लिए राज्य सरकार ने राज्य के बाल शिक्षा अधिकार कानून 2011 में प्रथम संशोधन करके शिक्षामित्रों को बगैर टीइटी के ही नियुक्त करने का नियम बनाया और बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 में 19वां संशोधन करके रूल 16 में उप क्लॉज़ जोड़ा और रूल 8 में शिक्षामित्र योग्यता को स्थान दिया ।
बीएड और बीटीसी बेरोजगारों ने समायोजन को चुनौती दी ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ० DY चंद्रचूड ने दोनों संशोधन रद्द कर दिया और शिक्षामित्रों को संविदाकर्मी बताकर उनका समायोजन निरस्त कर दिया ।
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यूपी बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है ।
शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण मामला NCTE पर छोड़ दिया ।
जब सुनवायी चल रही थी तो विजय राज भाई ने कहा कि राहुल भाई इलाहाबाद BSA का काउंटर चीफ साहब को दिखाया जाये तो मैंने कहा कि आप धैर्य रखें दुनिया का सर्वोच्च विद्वान के यहाँ सुनवाई हो रही है, अंत में सत्य खोज लेंगे ।
अंततः चीफ साहब ने संविदाकर्मी बताकर ही समायोजन निरस्त किया ।
ऑनलाइन वर्क में मैं थोड़ा कमजोर हूँ इसलिए श्याम देव मिश्र द्वारा खोजी गयी उमादेवी की नजीर को राजेश राव से मैंने मुकदमे में जिस तरह लिखाया था , चीफ साहब ने उसी शब्दों में आर्डर में उसे लिखाया है ।
शिक्षामित्र/सरकार सुप्रीम कोर्ट गये जहाँ पर उनको दिनांक 7.12.2015 को बीएड के 1100 याचियों को नियुक्ति देने की शर्त पर स्थगन मिला ।
मामला अभी पेंडिंग है ।
मुकदमे की मेरिट के अनुसार दो प्रश्न निर्मित होते हैं ।
1. जब शिक्षामित्र संविदाकर्मी थे तो फिर इनको प्रशिक्षण क्यों दिया गया क्योंकि वह प्रशिक्षण मात्र कार्यरत शिक्षक को ही दिया जा सकता है ?
2. जब इनका प्रशिक्षण अभी तक निरस्त नहीं है तो फिर ये कार्यरत शिक्षक क्यों नहीं थे और इनका समायोजन क्यों निरस्त हो?
शिक्षामित्र संविदाकर्मी थे लेकिन तथ्य छिपाकर उनको प्रशिक्षण दिया गया है अतः इनका प्रशिक्षण अवैध है ।
इनका प्रशिक्षण अवैध नहीं घोषित होता है शिक्षामित्र स्वयं को कार्यरत शिक्षक के आधार पर ही प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक बताएँगे ।
यदि ये कार्यरत शिक्षक थे तो इनको प्रशिक्षण के बाद फिर पुनः नियुक्ति की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
इस प्रकार शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण बचे चाहे न बचे परंतु समायोजन निरस्त होगा क्योंकि RTE एक्ट के बाद इनकी बगैर टीईटी नियुक्ति सम्भव नहीं है अतः समायोजन निरस्त होगा ।
इस प्रकार मुकदमे की मेरिट के तहत शिक्षामित्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से कोई भी राहत की खबर नहीं है ।
इनका प्रयास सिर्फ मुकदमे से भागना कब तक सफल रहेगा यह सर्वोच्च अदालत और इनकी किस्मत पर निर्भर है ।
अगली पोस्ट में बीएड की 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती विवाद, याची राहत एवं नये विज्ञापन पर मुकदमे की मेरिट के अनुसार तर्क रखूँगा ।
कोर्ट क्या करती है यह कोर्ट जानें ।