आदेश 61 पेज का है। आदेश के मुख्य बिंदु :1) 16वां संशोधन अवैध है।2) टीईटी भारांक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।3) सरकार को टीईटी भारांक देना बाध्यकारी है।4) एनसीटीई गाइड लाइन अवैध नहीं है।5) बिना भारांक दिए की गई समस्त भर्ती अवैध हैं।6) सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आने तक यथास्थिति बरकरार रहेगी।पूरा आदेश पीडीएफ फाइल में डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें। आदेश यहाँ देखें
3 लाख शिक्षकों का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर।* शिक्षक भर्ती के नियमों को स्पष्ट नहीं कर पा रही है एनसीटीई।* एनसीटीई कई बार सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि नियुक्ति के निर्धारण का अधिकार राज्य सरकार के पास।* उत्तर प्रदेश में एक ही पद के लिए दो तरीके से हो चुकी है नियुक्ति।* टेट वेटेज का भी मामला पकड़ लिया तूल।नई दिल्ली, संतोष कुशवाहा कुशीनगर।उत्तर प्रदेश के 3 लाख शिक्षकों का भविष्य अब सुप्रीम कोर्ट22 फरवरी की सुनवाई में तय करेगा।मज़े की बात ये है कि दो बड़ी भर्तियां 72825 शिक्षक भर्ती टेट मेरिट व करीब 80 हज़ार भर्तियां अकैडमिक मेरिट से राज्यसरकार कर चुकी है।टेट मेरिट व अकैडमिक मेरिट का मामला तो चल ही रहा था इसी बीच में टेट वेटेज का आ गया है।जिसमे पूरी तरह से एनसीटीई कठघरे में खड़ी हो गयी है।क्यों की एनसीटीई कई तरह का काउंटर अपने द्वारा शिक्षक भर्तीयों में लगा चुकी है।अकैडमिक मेरिट पर की गयी सभी नियुक्ति कोइलाहबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है।और पहले से लंबित इस मैटर के मामले सुप्रीम कोर्ट मेंचलने के वजह से अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के हवाले कर दिया है। 1लाख 32 हज़ार शिक्षकमित्रों का समायोजन इन दोनों नियमों से हटकर किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को आरटीएक्ट 2010 लागू होने से पहले के कार्यरत शिक्षक मानते हुए टेट से छूट देकर किया है।जो पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा निरस्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से स्टे के पर अपने पद पर बने हुए है।और इनका भी भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिका हुआ है।माननीय जस्टिस दीपक मिश्र जी को उत्तर प्रदेश के इस बड़े जटिलमामले को सुलझाने में बहुत देर लग रही है।क्यों की इस केस को माननीय दीपक मिश्रा जी पहले हीयाची लाभ देकर उलझा चुके है।याची लाभ देने का मतलब ये इस केस को मैनेज करने के तरफ ले जा रहे है।किन्तु इसी बीच में टेट वेटेज का मामला आ जाने से इनकीसमस्या और बढ़ गयी है।अब देखना है माननीय दीपक मिश्रा जी किस भर्ती कोगलत ठहराते है।या सभी शिक्षक भर्तीयों को राहत देते है।
इलाहाबाद : शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2016 का इम्तिहान समय पर कराने की तैयारी पर जिला विद्यालय निरीक्षकों ने पलीता लगा दिया। परीक्षा केंद्रों को तय करने में जिस तरह से विलंब हुआ उसका असर प्रवेश पत्र जारी करने एवं अन्य तैयारियों पर पड़ता दिख रहा है। लिखित परीक्षा होने में चंद दिन बचे हैं ऐसे में आवेदकों की धड़कनें तेज हो चली हैं।प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने की जिम्मेदारी परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव पर है। पिछले साल तमाम प्रयासों के बाद भी परीक्षा दो फरवरी, 2016 को हो पाई थी। इस बार परीक्षा नियामक ने टीईटी 2016 इसी साल कराने पर शासन को सहमत किया।बीते 26 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी हुए और तय कार्यक्रम के अनुरूप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व आवेदन लिए गए। परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से तय समय पर परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए आवेदकों की अनुमानित संख्या भी भेज दी गई। बीते 11 नवंबर तक जिला समिति को परीक्षा केंद्रों की सूची भेजनी थी, लेकिन गिने-चुने जिलों ही ऐसा कर पाए। अधिकांश को एक नहीं कई बार अनुस्मारक भेजा गया। इसके बाद भी सभी जिलों से 16 नवंबर तक सूचना परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय तक नहीं पहुंची।सचिव के नाराजगी जताने पर जिला विद्यालय निरीक्षकों ने कार्य पूरा किया। ऐसे में एनआइसी को परीक्षा केंद्रों की सूची भेजने में विलंब हुआ और वहां हर अभ्यर्थी के प्रवेशपत्र में केंद्र का नाम दर्ज होना है इसलिए उसमें भी समय लगा। अफसरों की अनदेखी के कारण तय कार्यक्रम गड़बड़ा गया है। ज्ञात हो कि 19 दिसंबर को होने वाली परीक्षा के लिए कम से कम 15 दिन पहले प्रवेश पत्र जारी होना था, लेकिन एडमिट कार्ड जारी करने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। अनुमान है कि सोमवार तक वेबसाइट पर एडमिट कार्ड अपलोड हो सकते हैं।