22.12.16

नियुक्ति दिलाए जाने की मांग पर प्रदर्शन, बीएड टीईटी उत्तीर्ण संघर्ष मोर्चा का कहना कोर्ट के आदेश के बाद भी नियुक्ति नहीं

ट्रेनिंग कराकर नियुक्ति दिलाए जाने की मांग को लेकर 2011-12 बीएड टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने बुधवार को लक्ष्मण मेला मैदान में प्रदर्शन किया। इससे पूर्व सभी ने चारबाग से विधान भवन तक सरकार विरोधी मार्च भी निकाला। बीएड टीईटी उत्तीर्ण संघर्ष मोर्चा के सदस्य ललित अवस्थी का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मांग पर अभी भी कोई नहीं आया तो वह जल्द ही विधान भवन का घेराव कर जोरदार आन्दोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस दौरान अजय, राजबहादुर, मनोज आदि शामिल रहे।

शिक्षक भर्ती में पिछड़ जाएंगे यूपी बोर्ड के अभ्यर्थी, जानिए क्या कहती मेरिट

प्रदेश के राजकीय इंटर कालेजों के एलटी वेतनमान के रिक्त पदों पर मेरिट के आधार पर होने जा रही शिक्षकों की भर्तियों में यूपी बोर्ड से पढ़े अभ्यर्थियों का पिछड़ना तय है। नब्बे के दशक वाले यूपी बोर्ड के अभ्यर्थी तो मेरिट की दौड़ में सिरे से गायब हो जाएंगे। अभ्यर्थी मेरिट के बजाय माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा के माध्यम से नियुक्तियां करने की मांग कर रहे हैं।
शासन ने भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। नियुक्तियां इस बार मंडलवार न होकर प्रदेश स्तर पर होनी हैं। मेरिट में हाई स्कूल, इंटर व स्नातक के साथ प्रशिक्षण डिग्री के प्रायोगिक व लिखित के अंक निर्धारित नियमों से जोड़े जाने हैं। यूपी बोर्ड के कालेजों के लिए नियुक्तियों को लेकर उसी बोर्ड से पढ़े अभ्यर्थी निराश हैं। इतिहास गवाह है कि सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड की मेरिट हमेशा से यूपी बोर्ड से अधिक रही है। विशिष्ट बीटीसी
शिक्षक चयन में भी यूपी बोर्ड के अभ्यर्थी हाथ मलते रहे और दूसरे बोर्ड के अभ्यर्थी आगे हो गए थे।
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क्या कहती मेरिट
सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड में तमाम परिवर्तनों के बावजूद 2016 की परीक्षा की मेरिट में यूपी बोर्ड केंद्रीय बोर्ड की मेरिट का मुकाबला नहीं कर सका। 10वीं में आईएसई टॉपर के अंक 99.20 फीसद थे तो यूपी बोर्ड में 98.67 फीसदा। 12वीं की परीक्षा में आईएसई टॉपर 99.50 फीसद पर था तो यूपी बोर्ड का 98.20 फीसद पर। सीबीएसई के मुकाबले यूपी बोर्ड के टॉपर इससे भी अधिक पीछे थे। इसके पहले के पांच सालों में तो यूपी बोर्ड की मेरिट 2016 से भी तीन से छह फीसद तक पीछे थी। इन दोनों बोर्ड में अधिकतर छात्र 85 से 95 फीसद तक अंक आसानी से पा जाते हैं जबकि यूपी बोर्ड में 2016 परीक्षा में सिर्फ 18. 16 फीसद विद्यार्थी विशेष योग्यता के (75 फीसद या इससे अधिक) अंक प्राप्त कर पाए थे। 90 के दशक में परीक्षार्थियों को इससे बहुत कम अंक मिले हैं।
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भर्ती परीक्षा से हों नियुक्तियां
प्रदेश के तमाम अभ्यर्थियों ने पिछले सप्ताह शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन करके प्रवक्ता भर्ती की भांति एलटी शिक्षकों की भर्ती भी परीक्षा के आधार पर करने की मांग की थी। चयन बोर्ड पहले से ही परीक्षा के आधार पर भर्तियां कर रहा है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड व झारखंड आदि राज्यों में भी परीक्षा के माध्यम से भर्तियां की जा रही हैं।
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''सभी बोर्ड की परीक्षा, मूल्यांकन व प्राप्तांक अलग अलग हैं। यूपी बोर्ड में हमेशा से कम अंक मिलते रहे हैं इसलिए मेरिट से प्रमाणिक मूल्यांकन नहीं हो पाएगा। यूपी बोर्ड के अभ्यर्थियों को कम अवसर मिलेंगे। परीक्षा के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों का चयन ज्यादा उचित होगा।''
- कृष्णमोहन त्रिपाठी, पूर्व निदेशक माध्यमिक शिक्षा

एटा के नए बीएसए रमाकांत वर्मा

राज्य मुख्यालय। एटा के नए बेसिक शिक्षा अधिकारी रमाकांत वर्मा होंगे। श्री वर्मा आंग्ल् भाषा संस्थान इलाहाबाद में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

वहीं एटा के बीएसए शौकीन सिंह यादव को आगरा डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता बना कर भेजा गया है। झांसी के डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता रावेन्द्र सिंह बघेल को उन्नाव इसी पद पर भेजा गया है।

स्नातक की डिग्री, समझ हाईस्कूल से कम

जागरण संवाददाता, आगरा: संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती में भाग ले रहे उच्च शिक्षा प्राप्त अभ्यर्थियों की पोल साक्षात्कार में खुल रही है। परास्नातक और स्नातक की डिग्रियां लेकर साक्षात्कार में पहुंच रहे ऐसे अभ्यर्थी हाईस्कूल स्तर के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए 1778 पदों के लिए 64 हजार आवेदकों ने फार्म भरे थे। पिछले 10 दिनों से नगर निगम में साक्षात्कार के द्वारा अभ्यर्थियों में से काबिल अभ्यर्थियों को तलाशा जा रहा है। भर्ती में सामान्य और उच्च शिक्षा प्राप्त अभ्यर्थियों के आवेदन से यह भर्ती शुरुआत से ही चर्चा में रही है। बड़ी संख्या में परास्नातक और स्नातक पास युवक दौड़ में होने से यह कहा जा रहा था कि बेरोजगारी के चलते देश का शिक्षित युवा वर्ग सफाई जैसे काम करने में भी परहेज नहीं कर रहा है, लेकिन अब तक हुए साक्षात्कार में इन अभ्यर्थियों की पोल खुल रही है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल टीम के सदस्यों से बातचीत के आधार पर सामने आया है कि उम्मीदवार भले ही
बीएससी और बीएड जैसी डिग्रिया धारक हैं, लेकिन उनका शिक्षा का स्तर बेहद कमजोर है। बीएससी पास अभ्यर्थी को हाईस्कूल के सूत्र पता नहीं हैं। यही हालत कॉमर्स और आर्ट्स विषयों के लोगों की है। समिति के सदस्यों के मुताबिक पढ़े लिखे युवाओं का ऐसा शैक्षिक स्तर देखकर वह भी हतप्रभ हैं।
एक चौथाई ने छोड़ा साक्षात्कार
संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए भले ही 64 हजार से अधिक आवेदन आए हों, लेकिन झाड़ू लगाकर और नाला साफ करके प्रायोगिक परीक्षा देने की हिचक में बड़ी संख्या में आवेदक साक्षात्कार छोड़ रहे हैं। पिछले 3 दिनों से कॉल लेटर के द्वारा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक सोमवार को 200 छात्रों में 132, मंगलवार को 168 और बुधवार को 141 मौजूद रहे। इस तरह देखा जाए तो अब तक एक चौथाई अभ्यर्थी परीक्षा छोड़ चुके हैं।