21.3.17

कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध, प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक की काउन्सलिंग प्रक्रिया, सत्यापन के बाद ही मिलेगा नियुक्ति पत्र

कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध, प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक की काउन्सलिंग प्रक्रिया, सत्यापन के बाद ही मिलेगा नियुक्ति पत्र

29334 गणित-विज्ञान सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हेतु आज जारी जिलों की विज्ञप्तियां, 82 अंक वालों को नियुक्ति



छात्रों को अध्यापन के लिए आकर्षित करेगी सरकार

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया है। इसके तहत एक ओर एमफिल और पीएचडी कर रहे छात्रों को अध्यापन की ओर आकर्षित किया
जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालयों को कहा गया है कि वे रिटायरमेंट के बाद भी 70 साल की उम्र तक शिक्षकों की सेवा लें। साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी की सूचना नियमित रूप से एक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। 1केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को स्पष्ट तौर पर माना कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने कहा, ‘शिक्षकों की कमी बहुत गंभीर मुद्दा है। देश में 41 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं और इनमें 20 फीसद रिक्तियां हैं। हमने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे रिक्तियां भरने की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रखें। यह वाक इन इंटरव्यू हो और रिक्तियों को तुरंत दूर किया जाए।’ रिक्तियों से जुड़ी निगरानी व्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा, ‘हमने तय किया है कि शिक्षकों की रिक्तियों को नियमित तौर पर डायनेमिक प्लेटफार्म पर पेश किया जाएगा। इस तरह कोई भी वेकेंसी की स्थिति कभी भी देख सकता है। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि वे हर 15 दिन में इसे अपडेट करें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट पर इसका लिंक होगा।’ इसी तरह शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विश्वविद्यालयों को कहा गया है कि शिक्षक अगर रिटायर के बाद भी स्वस्थ हों तो 70 साल की उम्र तक उनकी सेवा ली जाए।

प्राथमिक सहायक शिक्षकों की भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक

लखनऊ : हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती के दूसरे चरण में खाली रह गई सीटों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आरक्षण संबंधी प्रावधानों में विरोधाभास पाते हुए यह रोक लगाई है। जस्टिस डीके उपाध्याय की बेंच ने आरती साहू व कई अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
करते हुए यह आदेश दिया है। इस मामले में याचियों ने प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती के दूसरे चरण में भरी न जा सकीं सीटों पर खुद की भर्ती की बाबत विचार करने का आदेश देने की प्रार्थना की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि भरी न जा सकीं सीटों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए उप्र लोक सेवा (अनुसूचित जाति-जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्गो के लिए आरक्षण) अधिनियम-1994 की धारा-3 की उपधारा-1, 2 व 3 में विरोधाभास है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को यह स्पष्ट करने का आदेश दिया था कि धारा-3 के अनुपालन के लिए क्या तरीका अपनाया जा रहा है। 10 मार्च को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बताया था कि मामले पर विधिक सलाह मांगी गई है और प्रकरण विचाराधीन है। इस पर कोर्ट ने प्रणाली के स्पष्ट न होने के कारण बेसिक शिक्षा बोर्ड के सचिव के छह फरवरी के उस सकरुलर पर रोक लगा दी, जिसके द्वारा यह भर्तियां की जानी थीं।