10.4.17
योगी सरकार द्वारा चयन प्रक्रिया व नई भर्तियों पर बिना किसी वाजिब कारण रोकना गलत: छात्र-युवा संगठन
योगी सरकार द्वारा चयन प्रक्रिया व नई भर्तियों पर बिना किसी वाजिब कारण अनिश्चितकालीन रोक लगाने के खिलाफ कल से छात्रों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। दरअसल इस छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस निर्णय पर पुनर्विचार के लिए इलाहाबाद से लेकर लखनऊ तक छात्रों ने योगी कैबिनेट के प्रमुख
मंत्रियों से मिले, उनके द्वारा समुचित आश्वासन भी दिया गया। लेकिन एक तरफ छात्रों को उनके भविष्य के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न होने देने का आश्वासन दिया जाता रहा वहीं दूसरी तरफ मीडिया में यह खबर भी प्रकाशित कराई गईं कि समस्त भर्तियों की जांच कराने के बाद ही आयोग व चयन बोर्ड में कामकाज शुरू होगा। इससे प्रतियोगी छात्रों में न सिर्फ योगी सरकार के कामकाज करने के तरीके से निराश हुए बल्कि नाउम्मीद होकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया। गौरतलब है कि भाजपा के घोषणा पत्र में 90 दिनों में प्रदेश में खाली समस्त पदों पर विज्ञापन जारी करने की एक महत्वपूर्ण वादा किया गया है। सवाल यह है कि चयन का सारा कामकाज ही अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया गया है तब 90 दिन में इस वादे को योगी सरकार कैसे पूरा करेगी। पहली कैबिनेट की बैठक में भी इस संबंध में कोई घोषणा कर योगी सरकार ने युवओं को निराश किया है और उन्हें सड़क पर आकर आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। छात्र-युवाओं से अपील है कि कल से(माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड) शुरू हो रहे आंदोलन में शामिल हों और योगी सरकार के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले निर्णय को वापस लेने के लिए बाध्य कर दें।
मंत्रियों से मिले, उनके द्वारा समुचित आश्वासन भी दिया गया। लेकिन एक तरफ छात्रों को उनके भविष्य के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न होने देने का आश्वासन दिया जाता रहा वहीं दूसरी तरफ मीडिया में यह खबर भी प्रकाशित कराई गईं कि समस्त भर्तियों की जांच कराने के बाद ही आयोग व चयन बोर्ड में कामकाज शुरू होगा। इससे प्रतियोगी छात्रों में न सिर्फ योगी सरकार के कामकाज करने के तरीके से निराश हुए बल्कि नाउम्मीद होकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया। गौरतलब है कि भाजपा के घोषणा पत्र में 90 दिनों में प्रदेश में खाली समस्त पदों पर विज्ञापन जारी करने की एक महत्वपूर्ण वादा किया गया है। सवाल यह है कि चयन का सारा कामकाज ही अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया गया है तब 90 दिन में इस वादे को योगी सरकार कैसे पूरा करेगी। पहली कैबिनेट की बैठक में भी इस संबंध में कोई घोषणा कर योगी सरकार ने युवओं को निराश किया है और उन्हें सड़क पर आकर आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। छात्र-युवाओं से अपील है कि कल से(माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड) शुरू हो रहे आंदोलन में शामिल हों और योगी सरकार के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले निर्णय को वापस लेने के लिए बाध्य कर दें।
शिक्षामित्रों सहित 72825 शिक्षकों की नियुक्ति व अकेडमिक मेरिट की सभी भर्ती विवादों पर सुप्रीमकोर्ट कल सुनाएगा ऐतिहासिक फैसला
शिक्षामित्रों, शिक्षकों की नियुक्ति व अकेडमिक मेरिट सहित सभी भर्ती विवादों पर सुप्रीमकोर्ट कल ऐतिहासिक फैसला सुनाएगा,
इलाहाबाद : शिक्षामित्रों व शिक्षकों के नियुक्ति की सुनवाई मंगलवार को होगी। शीर्ष कोर्ट में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों के समायोजन, 72 हजार शिक्षक भर्ती व टीईटी उत्तीर्ण युवाओं के प्रकरण की सुनवाई होगी। पिछले एक वर्ष से बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की सुनवाई लगातार टल रही है। इससे करीब दो लाख 75 हजार शिक्षकों की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। उम्मीद है कि इस बार सुनवाई आगे बढ़ेगी।1सूबे के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जा चुका है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 सितंबर 2015 को समायोजन रद कर दिया था। इस आदेश के बाद करीब 32 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन भी रोक दिया गया। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने सात दिसंबर 2015 को समायोजित शिक्षामित्रों को राहत देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही 72825 शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट व बीटीसी अभ्यर्थियों की भर्ती एकेडमिक मेरिट पर हुई। साथ ही 12091 की नियुक्ति, 1100 याची प्रकरण आदि मामले शीर्ष कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन हैं। इन मामलों की सुनवाई पहले सात अप्रैल को होनी थी, उसे बढ़ाकर 11 अप्रैल कर दिया गया है। शीर्ष कोर्ट के कमरा नंबर 13 में जस्टिस आदर्श गोयल व जस्टिस यूयू ललित की बेंच इन मामलों की सुनवाई करेगी। पहले इस प्रकरण की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्र व जस्टिस खानवेलकर कर रहे थे, लेकिन दोनों ने सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, तब नई बेंच का गठन किया गया है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के आदेश पर टिकी हैं। टीईटी मोर्चा के साथ ही दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी अपने-अपने बिंदु पर पैरवी कर रहे हैं।
इलाहाबाद : शिक्षामित्रों व शिक्षकों के नियुक्ति की सुनवाई मंगलवार को होगी। शीर्ष कोर्ट में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों के समायोजन, 72 हजार शिक्षक भर्ती व टीईटी उत्तीर्ण युवाओं के प्रकरण की सुनवाई होगी। पिछले एक वर्ष से बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की सुनवाई लगातार टल रही है। इससे करीब दो लाख 75 हजार शिक्षकों की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। उम्मीद है कि इस बार सुनवाई आगे बढ़ेगी।1सूबे के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जा चुका है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 सितंबर 2015 को समायोजन रद कर दिया था। इस आदेश के बाद करीब 32 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन भी रोक दिया गया। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने सात दिसंबर 2015 को समायोजित शिक्षामित्रों को राहत देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही 72825 शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट व बीटीसी अभ्यर्थियों की भर्ती एकेडमिक मेरिट पर हुई। साथ ही 12091 की नियुक्ति, 1100 याची प्रकरण आदि मामले शीर्ष कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन हैं। इन मामलों की सुनवाई पहले सात अप्रैल को होनी थी, उसे बढ़ाकर 11 अप्रैल कर दिया गया है। शीर्ष कोर्ट के कमरा नंबर 13 में जस्टिस आदर्श गोयल व जस्टिस यूयू ललित की बेंच इन मामलों की सुनवाई करेगी। पहले इस प्रकरण की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्र व जस्टिस खानवेलकर कर रहे थे, लेकिन दोनों ने सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, तब नई बेंच का गठन किया गया है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के आदेश पर टिकी हैं। टीईटी मोर्चा के साथ ही दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी अपने-अपने बिंदु पर पैरवी कर रहे हैं।
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