25.1.17

विद्यालयों को सब्सिडी के लिए आधार जरूरी नहीं, अभी तक यह सब्सिडी यूनिक डायस कोड के जरिए मिलती थी

जागरण संवाददाता, चन्दौसी : परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही एलपीजी की सब्सिडी के लिए आधार कार्ड का नंबर जरूरी नहीं है। अभी तक यह सब्सिडी यूनिक डायस कोड के जरिए मिलती थी। सब्सिडी खातों में नहीं आने पर शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। उन्हें गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। गैस सिलेंडर डिलीवर होने पर स्वत: ही खाते में सब्सिडी पहुंच जाएगी।

परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील की योजना संचालित है। इस योजना के माध्यम से बच्चों को पका-पकाया भोजन खाने के लिए दिया जाता है। खाना बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने स्कूलों में गैस कनेक्शन की व्यवस्था की थी लेकिन एलपीजी की सब्सिडी के लिए आधार कार्ड नंबर जरूरी कर दिया गया है, जिसके कारण शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पर भी कई बार सब्सिडी नहीं आ पाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब स्कूलों में प्रयोग होने वाली गैस की सब्सिडी के लिए आधार कार्ड नंबर की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
बीटीसी (बैंक ट्रांसफर कंप्लायंट) मोड के माध्यम से मिड-डे-मील के खाते में स्वत: ही सब्सिडी पहुंच जाएगी। इस संबंध में मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव ने बेसिक शिक्षाधिकारियों को जारी किए हैं। जिला समन्वयक मिड-डे-मील दीनदयाल शर्मा ने बताया कि पहले यूनिक डायस कोड के जरिए सब्सिडी आती थी, जिससे सब्सिडी मिलने पर परेशानी होती थी। अब परेशानी नहीं होगी।’

क्या अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे : कोर्ट

क्या अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे : कोर्ट
अदालत ने नर्सरी दाखिले से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी स्कूलों की हालत पर जताई चिंता
हाईकोर्ट ने कहा, बुरे फंसे
अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता है। अमेरिका में लोग अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराना चाहते हैं, क्योंकि वहां स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं हैं। वहां सरकारी स्कूलों में
बेहतर शिक्षक हैं, लेकिन हमारे देश में शिक्षक कक्षाओं में जाते ही नहीं। मुद्दा केवल सुविधाओं का नहीं है। हर किसी को अपनी पसंद का संस्थान चुनने का अधिकार है। अभी इन स्कूलों को निजी स्कूलों की बराबरी करने में काफी वक्त लगेगा। उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार की तरफ से निजी स्कूलों में नेबरहुड के तहत नर्सरी में दाखिला नीति को सही ठहराया गया। उनकी तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता 298 स्कूलों ने तय शतरें पर डीडीए से सस्ती दरों पर भूमि ली है और उन्हें इस नीति का पालन करना ही होगा। उन्होंने सोमवार को फीस बढ़ोतरी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा अब दायर याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य ही नहीं है। शिक्षा निदेशालय व उपराज्यपाल की तरफ से पेश एडिशनल सॉलीसिटर जनरल संजय जैन व दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि नेबरहुड एक अच्छी नीति है और उसे लागू करना जनहित में है। राहुल मेहरा ने कहा कि सरकारी स्कूलों की पूर्व व वर्तमान हालत में काफी अंतर है। अब सभी स्कूलों में शौचालय है, पीने का पानी व पर्याप्त शिक्षक भी हैं।

प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान, यूथ पार्लियामेंट के दूसरे दिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा, युवा सांसदों ने जनता की सहूलियत के लिए पेश की योजनाएं

इलाहाबाद : यूथ पार्लियामेंट के बजट सत्र के दूसरे दिन महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा हुई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी शांति अध्ययन केंद्र में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने बिल एवं मुददों पर विचार व्यक्त किए। मंगलवार को सदन की कार्यवाही बजट भाषण से शुरू हुई। बजट भाषण 50 मिनट में खत्म हुआ। 1बजट में शिक्षा के लिए सदन का माहौल सकारात्मक रहा। प्राथमिक शिक्षा में इंटरनेट लनिर्ंग के लिए 5000 करोड़ का धन आवंटित किया गया। बजट उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को लेकर भी संजीदा
थी। इसमें 20 राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों को विश्व की शीर्ष 100 की सूची में शामिल कराने का लक्ष्य रखा गया। उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के लिए सीटों को बढ़ाने की घोषणा हुई। 1इसी प्रकार मानव संसाधन मंत्रलय को 72,394 करोड़ से 100,390 करोड़ रूपये आवंटित किए गए। सामाजिक स्वास्थ्य और साफ सफाई के लिए सरकार ने बताया कि अब तक पूरे भारत में 35416 अस्पताल खोल कर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने की शुरूआत की गई। नि:शुल्क दवा वितरित करने के लिए 3 हजार जेनरिक मेडिकल स्टोर खोलने की घोषणा की गयी। 7वां वेतन आयोग लागू होने के कारण सरकार पर एक लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ आया जिस कारण कई फ्लैगशिप योजनाओं से फंड की कटौती की गई। लोक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जननी सुरक्षा योजना, कुपोषण भगाओ अभियान जैसी योजनाओं को लांच किया। प्रत्येक परिवार के लिए एक-एक लाख रूपये के स्वास्थ्य कवर देने की घोषणा की गई। सत्र में बुजुर्गो के लिए अतिरिक्त 30000 रूपये देने की घोषणा हुई। सभी जनपदों में डायलिसिस केंद्र खोलने की घोषणा की गयी। सरकार ने पेयजल और स्वच्छता मंत्रलय को पिछले वर्ष की अपेक्षा 14010 से बढ़ाकर 15000 करोड़ की राशि आवंटित की। कृषि एवं कल्याण मंत्रलय के लिए पिछले वर्ष 35.984 करोड़ की तुलना में 39984 करोड़ का बजट आवंटन किया गया। पिछले वर्ष नाबार्ड को सिंचाई निधि के लिए दिए गए 20000 करोड़ से घटाकर 10000 करोड़ कर दी गयी। जैविक खेती हेतु कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए 10 लाख कम्पोस्ट गड्ढे बनाने की घोषणा हुई। अबकी कृषि ऋण के लक्ष्य को 9 लाख करोड़ से बढ़ाकर 9. 10 लाख करोड़ की व्यवस्था की गई। इसके अतिरिक्त प्रति ग्राम पंचायत 80 लाख और प्रति शहरी निकाय 21 करोड़ की सहायता देने की घोषणा हुई। 1ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि के लिए डेयरी योजना पर बल देते हुए पशुधन संजीवनी तथा नकुल स्वास्थ्य पशु योजनाओं की घोषणा की गयी। प्रत्येक जनपद में एक उन्नत ब्रीडिंग प्रौद्योगिकी केंद्र खोलने की व्यवस्था की गयी। बजट में स्वरोजगार विकसित करने के लिए मुद्रा योजना की घोषणा की गयी। इसमें शिशु, किशोर, तरुण योजना लोन की घोषणा की गयी। 1विपक्ष ने लगाया कुठाराघात का आरोप : विपक्ष से युवा सांसद आलोक कुमार ने बजट में खेल के लिए उचित धन आवंटित न करने पर खिलाड़ियों के साथ सरकार के कुठाराघात का आरोप लगाया और बजट को घोषणाओं का पुलिंदा बताया।इलाहाबाद विवि के गांधी भवन में आयोजित यूथ पार्लियामेंट के बजटसत्र के प्रतिभागी ’ जागरण

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